झारखंड में नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का आंदोलन: मुख्यमंत्री सोरेन का बयान
मुख्यमंत्री सोरेन का अभ्यर्थियों के प्रति समर्थन
रांची/जमशेदपुर, चार अगस्त: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार नौकरी के लिए प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर उचित निर्णय समय पर लिया जाएगा। यह बयान तब आया है जब अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। ये अभ्यर्थी 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। उनकी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की जांच झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति द्वारा कराई जाए।
जांच की प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री का बयान
सोरेन ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी मांगों का समाधान गंभीरता से किया जाएगा और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच एजेंसियां सभी अनियमितताओं की गहन जांच कर रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोरेन से आंदोलनरत युवाओं के साथ सीधे संवाद करने और सीबीआई जांच की मांग पर विचार करने का आग्रह किया। दास ने जमशेदपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रों से बातचीत करने और उचित कार्रवाई की अपील की है।
छात्रों की समस्याएं और सरकार की जिम्मेदारी
दास ने कहा कि छात्र बिना किसी कारण के सड़कों पर नहीं उतरे हैं, बल्कि वे भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह उनसे सीधे बातचीत करे और सीबीआई जांच की मांग पर विचार करे।
आंदोलन की गंभीरता और सीआईडी की कार्रवाई
दास ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बुनियादी सुविधाएं जैसे तंबू, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में सीआईडी ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।