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झारखंड के छात्रों का अनोखा प्रदर्शन: रचनात्मकता के माध्यम से उठाई जा रही आवाज़

झारखंड के छात्र सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ एक अनोखे और रचनात्मक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे व्यंग्यात्मक पोस्टर और कविता के माध्यम से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। इस आंदोलन में छात्रों ने न केवल अपनी मांगें रखी हैं, बल्कि उन्होंने एक सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। जानें कैसे ये छात्र अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और क्या हैं उनकी प्रमुख मांगें।
 

रचनात्मकता से भरा प्रदर्शन

रांची, नौ अगस्त: झारखंड के छात्र सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ अपने गुस्से को रचनात्मक तरीके से व्यक्त कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न प्रकार के व्यंग्यात्मक पोस्टर और सरकारी नौकरियों के फर्जी 'रेट कार्ड' लगाए गए हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 500 रुपये के नोटों की तरह दिखने वाले गड्डियों से लदा एक तराजू रखा गया है।


कविता के माध्यम से संदेश

छात्र रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध रचना 'रश्मिरथी' की पंक्तियों का पाठ करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस कविता का 'कृष्ण की चेतावनी' खंड विशेष रूप से लोकप्रिय है, जिसमें महाभारत के प्रसंग को वर्तमान भर्ती आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। छात्र इन पंक्तियों के माध्यम से पांडवों के संघर्ष की तुलना सरकारी भर्तियों में अनिश्चितता से कर रहे हैं।


व्यंग्यात्मक पोस्टर और तख्तियां

कुछ छात्रों ने 'नौकरी बिक्री केंद्र' का निर्माण किया है, जिसमें विभिन्न पदों की कीमतें दर्शाई गई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक 'मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना' का जिक्र करते हुए लिखा गया है, 'पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।' प्रदर्शनकारी विवेक ने अपनी टी-शर्ट पर लिखा है, 'व्यवस्था ने हमें निराश किया है।'


न्याय की मांग

एक छात्रा झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन के पोस्टर के सामने खड़ी होकर मुख्यमंत्री से 'अन्याय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई' की अपील कर रही है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने एक पोस्टर पकड़ा है, जिसमें न्यायाधीश को सूक्ष्मदर्शी से कागज की जांच करते दिखाया गया है।


आंदोलन की दिशा

छात्रों का यह आंदोलन केवल भर्ती प्रक्रिया में सुधार पर केंद्रित है। 'जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच' ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदर्शन में अपमानजनक भाषा का प्रयोग न हो। आयोजकों ने एक 'आचार संहिता' जारी की है, जिसमें राजनीतिक, धार्मिक या जातिगत बयान देने से बचने की अपील की गई है।


आगे की मांगें

छात्रों की मांग है कि 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा को रद्द किया जाए और भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की समिति से कराने की मांग की गई है।