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ज्येष्ठ महीने में घर के बड़े सदस्यों के लिए विशेष कार्य

ज्येष्ठ महीने का महत्व हिंदू धर्म में विशेष है। यह महीना 2 मई से 31 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। इस दौरान घर के बड़े सदस्यों को जल दान, पूजा-अर्चना, पितरों के लिए तर्पण, और पेड़-पौधों की सेवा जैसे कार्य करने चाहिए। इसके अलावा, दान का भी विशेष महत्व है। जानें इस पवित्र महीने में और क्या करना चाहिए ताकि परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे।
 

ज्येष्ठ महीने का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना 2 मई से शुरू होकर 31 मई 2026 तक चलेगा। इस महीने को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान सूर्य देव, हनुमान जी, तुलसी और वरुण देव की पूजा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस पवित्र समय में घर के बड़े सदस्यों द्वारा किए गए शुभ कार्य परिवार की समृद्धि में सहायक होते हैं।


ज्येष्ठ महीने की तिथियाँ

दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की शुरुआत नारद जयंती के दिन 2 मई 2026 को होगी और इसका समापन 31 मई 2026 को होगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार जैसे अपरा एकादशी, वृषभ संक्रांति, और गंगा दशहरा मनाए जाएंगे।


घर के बड़े सदस्यों के लिए कार्य

जल दान: इस महीने में बड़े सदस्यों को प्यासे को पानी पिलाना चाहिए और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।


पूजा-अर्चना: भगवान विष्णु, सूर्य देव और हनुमान जी की विशेष पूजा करनी चाहिए। बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है।


पितरों के निमित्त तर्पण: ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए और सफेद फूल तथा काले तिल अर्पित करने चाहिए।


पेड़-पौधों की सेवा: तुलसी, पीपल और बरगद के पेड़ में जल अर्पित करना पुण्यदायी होता है।


दान: इस महीने में सत्तू, गुड़, मौसमी फल, ठंडा पानी, पंखा, कूलर, छाता और जूते-चप्पलों का दान करना शुभ माना जाता है।


शादी के संबंध में सावधानियाँ

ज्येष्ठ महीने में परिवार के बड़े बेटे या बेटी का विवाह करना अशुभ माना जाता है। इस दौरान बड़े सदस्यों को अपनी संतान को तांबे का बर्तन या गुड़ से बनी वस्तुएं देना शुभ होता है।