×

जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के आरोपों का किया खंडन, संसद में पारित हुआ पेपर लीक रोकने वाला बिल

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस ने केवल आँसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को पारित किया, जो पेपर लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करता है। जानें इस बिल के प्रमुख बिंदुओं और संसद में हुई चर्चा के बारे में।
 

विपक्ष के आरोपों का जवाब

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 29 जुलाई को विपक्ष द्वारा पुलिस की ज्यादतियों के संबंध में उठाए गए सवालों का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि कोई गोली नहीं चलाई गई, केवल आँसू गैस का उपयोग किया गया। उन्होंने बताया कि इस तरह के आदेश देने का अधिकार केवल मजिस्ट्रेट के पास होता है, न कि मंत्री के पास। लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पर चर्चा के दौरान, मंत्री ने राहुल गांधी द्वारा संसद में की गई असंसदीय टिप्पणियों की भी कड़ी निंदा की।


बिल का पारित होना

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह वास्तव में चौंकाने वाला है कि राहुल गांधी ने संसद में 'मूर्ख' जैसे शब्दों का प्रयोग किया। लोकसभा ने बुधवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' को पारित किया। यह बिल उस समय पारित हुआ जब राहुल गांधी की अमित शाह के खिलाफ टिप्पणियों पर हंगामा हो रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गृह मंत्री ने 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया।


NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ कदम

NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद, यह बिल विपक्ष के जोरदार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित किया गया। केंद्र सरकार ने सोमवार को इस संशोधन बिल को पेश किया था, जो NEET विवाद के चलते देशभर में छात्रों के विरोध के कुछ ही दिनों बाद आया, जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस कानून का उद्देश्य 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट' में संशोधन करना है।


कड़ी सजा का प्रावधान

इस प्रस्तावित कानून के तहत परीक्षा के पेपर लीक करने में शामिल व्यक्तियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। हाल ही में मंजूर हुए बिल में पेपर लीक मामलों की जांच के लिए दो महीने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसमें गलत तरीकों में शामिल लोगों के लिए सजा को 2024 के एक्ट के तहत पांच साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है।


फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव

बिल में तीन महीने के भीतर मामलों को निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है। संगठित अपराधियों के लिए अधिकतम जुर्माना मौजूदा कानून के तहत तय सीमा से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया गया है।