×

जापान का MUFG करेगा भारतीय स्टार्टअप्स में $250 मिलियन का निवेश

जापान का मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (MUFG) भारतीय स्टार्टअप्स के लिए 250 मिलियन डॉलर का नया फंड स्थापित कर रहा है। यह फंड प्रारंभिक और विकासशील स्टार्टअप्स में निवेश करेगा, और इसकी राशि को बढ़ाकर 400 मिलियन डॉलर तक किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स में बढ़ती रुचि को दर्शाना है, खासकर फिनटेक और डिजिटल सेवाओं में। जानें इस निवेश का महत्व और भविष्य की संभावनाएं।
 

MUFG का नया फंड भारतीय स्टार्टअप्स के लिए

जापान का प्रमुख वित्तीय समूह, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (MUFG), भारतीय स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2,300-2,400 करोड़ रुपए) का एक नया फंड स्थापित कर रहा है। इस फंड का उद्देश्य प्रारंभिक और विकासशील स्टार्टअप्स में निवेश करना है। MUFG ने संकेत दिया है कि इस फंड की राशि को बढ़ाकर 400 मिलियन डॉलर तक किया जा सकता है। इस पहल का नेतृत्व मयंक शिरोमणि करेंगे, जो MUFG इनोवेशन पार्टनर्स के डिप्टी चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर हैं। यह विकास ऐसे समय में हो रहा है जब बड़े वेंचर फंड्स भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं।


नए निवेशकों की बढ़ती रुचि

ये नए फंड्स सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल जैसे पूर्ववर्ती फंड्स की जगह ले रहे हैं, जो 2020 से 2023 के बीच काफी सक्रिय थे। MUFG, सस्केहन्ना एशिया वीसी, एनरिसन इंडिया कैपिटल, एसएमबीसी एशिया राइजिंग फंड और मिराए एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स जैसे फंड्स 2025 तक भारत में अपने निवेश को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इन नए निवेशकों ने फिनटेक, उपभोक्ता इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं से जुड़े स्टार्टअप्स में निवेश किया है।


पिछले वर्षों का विश्लेषण

वेंचर इंटेलीजेंस के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक मिराए और MUFG ने चार-चार डील्स में निवेश किया है, जबकि सस्केहन्ना ने 10 और एनरिशन ने 15 वेंचर डील्स में भाग लिया है। इसके विपरीत, टाइगर ग्लोबल ने 2021 में 55 और 2022 में 47 निवेश किए, लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर छह रह गई। सॉफ्टबैंक ने भी 2021 में 17 और 2022 में चार निवेश किए, लेकिन उसके बाद कोई नया निवेश नहीं किया।


भारत में निवेश का नया दृष्टिकोण

यह बदलाव भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्तमान में निवेश करने वाले निवेशकों का मानना है कि वैल्यूएशन सही स्तर पर आ गए हैं। प्रतिस्पर्धा कम हो गई है, और भारत की डिजिटल उपभोक्ता आदतें अब मुख्यधारा में आ गई हैं। यह स्थिति टाइगर ग्लोबल और सॉफ्टबैंक के निवेश में आई भारी गिरावट के विपरीत है।


फाइनेंशियल सेक्टर पर ध्यान

पिछले तीन वर्षों में, बड़ी बैलेंस शीट वाली वित्तीय सेवा कंपनियों ने भी भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश करने में रुचि दिखाई है। SMBC एशिया राइजिंग फंड ने भारतीय वित्तीय सेवाओं के पूरे क्षेत्र में निवेश किया है। इस फंड ने अब तक भारतीय फिनटेक स्टार्टअप्स में लगभग 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।