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जलवायु परिवर्तन से नीलगिरी के चाय बागानों को खतरा

जलवायु परिवर्तन और सुपर अल नीनो की स्थिति ने नीलगिरी के चाय बागानों के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में वृद्धि और बारिश के असमान वितरण से चाय की गुणवत्ता और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और संभावित समाधान के बारे में।
 

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

उधगमंडलम, 27 जुलाई: वैश्विक जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते तापमान और मौसम में आ रहे बदलाव, विशेषकर ‘सुपर अल नीनो’ की स्थिति, नीलगिरी जिले के चाय बागानों के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश कर रहे हैं। एक अधिकारी ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि चाय की छोटी पत्तियों की लगातार कटाई के कारण, जलवायु में होने वाले छोटे-छोटे परिवर्तन भी इन पत्तियों की वृद्धि, गांठों के बीच की लंबाई, कटाई के समय, उत्पादन, पौधों के स्वास्थ्य और चाय की गुणवत्ता पर सीधा असर डालते हैं।


अधिकारी ने कहा कि मानव गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन ने बागान आधारित कृषि में इन समस्याओं को और बढ़ा दिया है। औसत तापमान में वृद्धि, बारिश का असमान वितरण, लंबे समय तक सूखे की स्थिति, पाला, ओलावृष्टि, अत्यधिक बारिश और कीटों व बीमारियों के फैलने के समय में बदलाव जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। कन्नूर में ‘यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया’ (यूपीएएसआई) टी रिसर्च फाउंडेशन के परामर्श अधिकारी पी. मुरुगेसन के अनुसार, “दक्षिण भारत के चाय क्षेत्रों, विशेषकर नीलगिरी में, चाय उत्पादन केवल साल भर की कुल बारिश पर निर्भर नहीं करता, बल्कि बारिश के समय और वितरण पर भी निर्भर करता है।”


हालांकि साल भर की कुल बारिश सामान्य बनी रह सकती है, लेकिन सूखे दिनों की संख्या में वृद्धि और कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाओं के कारण खेती के लिए आवश्यक नमी की कमी हो सकती है। मुरुगेसन ने अपने शोध पत्र ‘सुपर अल नीनो: नीलगिरी के लिए रोकथाम और अनुकूलन रणनीतियां’ में बताया कि चाय (कैमेलिया साइनेंसिस) पर्यावरण में होने वाले छोटे बदलावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि तापमान, मिट्टी में नमी, सूर्य की रोशनी और आर्द्रता जैसे महत्वपूर्ण कारक फसल की वृद्धि और पत्तियों की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।


मुरुगेसन ने कहा कि लंबे समय के मौसम संबंधी आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में सालाना कुल बारिश की मात्रा में कोई बड़ी कमी नहीं आई है, लेकिन बारिश के समय और वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने नीलगिरी के लंबे समय के वेधशाला आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में सूखे दिनों की संख्या बढ़ रही है, कम समय में तेज बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, औसत तापमान में लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और पाले तथा ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान का भौगोलिक क्षेत्र भी बढ़ गया है। मुरुगेसन ने कहा, “चूंकि चाय की नई कलियों की लगातार कटाई की जाती है, इसलिए मौसम की ये अस्थिर परिस्थितियां सीधे तौर पर गांठों के बीच की लंबाई, कलियों के विकास और कटाई के समय को प्रभावित करती हैं। इससे लंबे समय में पौधों के स्वास्थ्य और फसल उत्पादन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।”


उन्होंने ‘सुपर अल नीनो’ के बढ़ते खतरे को देखते हुए तत्काल अनुकूलन उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।