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जर्मनी ने गांजे को वैध किया, यूरोप का पहला देश बना

जर्मनी ने 1 अप्रैल को गांजे को वैध कर दिया, जिससे यह यूरोप का पहला देश बन गया है। नए कानून के तहत, 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग 25 ग्राम तक गांजा रख सकते हैं और पौधे उगा सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य संगठनों ने चिंता जताई है कि यह कानून युवाओं में गांजे के उपयोग को बढ़ावा दे सकता है। सरकार ने इस कानून के साथ-साथ जागरूकता अभियानों का वादा किया है। जानें इस नए कानून के प्रभाव और स्वास्थ्य पर इसके संभावित खतरे।
 

जर्मनी में गांजे का वैधकरण


गांजा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, लेकिन कई अध्ययनों ने यह दर्शाया है कि इसका उपयोग पुराने दर्द, मल्टीपल स्केलेरोसिस और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में सहायक हो सकता है। जबकि अधिकांश देशों ने गांजे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है, जर्मनी ने हाल ही में इसके उपयोग को वैध कर दिया है। यह यूरोप का पहला देश है जिसने गांजे को कानूनी मान्यता दी है।


1 अप्रैल को, जर्मनी ने गांजे को वैध करने का निर्णय लिया। नए कानून के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग 25 ग्राम तक सूखी गांजा रख सकते हैं और घर में गांजे के पौधे उगा सकते हैं। इस निर्णय का विरोध करने वाले कई विपक्षी नेता और चिकित्सा संगठन मौजूद थे, फिर भी कानून लागू हुआ। जैसे ही आधी रात को यह कानून प्रभावी हुआ, बर्लिन के ब्रैंडेनबर्ग गेट पर सैकड़ों लोगों ने जश्न मनाया।


स्वास्थ्य संगठनों की चिंताएं

सरकार का मानना है कि इस नए कानून के माध्यम से कालाबाजारी को रोका जा सकेगा और दूषित गांजे के सेवन से लोगों को बचाया जा सकेगा। हालांकि, स्वास्थ्य संगठनों ने चिंता व्यक्त की है कि यह कानून युवाओं में गांजे के उपयोग को बढ़ावा दे सकता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


सरकार ने इस कानून के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अभियानों का वादा किया है। इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूलों और खेल के मैदानों से 100 मीटर की दूरी पर गांजे के सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है।