जयशंकर ने पश्चिमी देशों की दोहरी नीति को किया बेनकाब
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड में आयोजित एक वार्ता में पश्चिमी देशों की दोहरी नीति को उजागर किया। उन्होंने भारत और रूस के संबंधों पर सवाल उठाने वाले यूरोपीय देशों को जवाब देते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा नीति लागत और उपलब्धता पर आधारित है। जयशंकर ने यह भी बताया कि अमेरिका ने 2022 में भारत से रूसी तेल खरीदने का आग्रह किया था। उनका बयान भारत की विदेश नीति के आत्मविश्वास और बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत है।
Jun 12, 2026, 11:41 IST
भारत के विदेश मंत्री का स्पष्ट बयान
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जो अपनी स्पष्टता और तीखे उत्तरों के लिए जाने जाते हैं, ने एक बार फिर पश्चिमी देशों की दोहरी नीति को उजागर किया है। फिनलैंड में आयोजित कुलतारांता वार्ता के दौरान, जब भारत और रूस के संबंधों पर सवाल उठाए गए, तो जयशंकर ने यूरोप को स्पष्टता से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी यूरोपीय देश ने भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया है, जबकि यूरोप से खरीदे गए हथियारों का उपयोग भारत के खिलाफ किया गया है। ऐसे में किसी को भी भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का अधिकार नहीं है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की स्थिति
जयशंकर ने "उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा" विषय पर चर्चा के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि क्या भारत रूस के प्रति अधिक नरम हो गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी यूरोपीय देश भारतीय हथियारों का शिकार नहीं बना, लेकिन यूरोपीय हथियारों का उपयोग भारत के खिलाफ लगातार होता रहा है। यह एक पुरानी हकीकत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कभी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला, फिर भी यूरोप भारत की नीतियों पर सवाल उठाने से नहीं चूकता।
रूस से तेल खरीदने का बचाव
विदेश मंत्री ने रूस से तेल खरीदने के भारत के निर्णय का मजबूती से समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति राजनीतिक दबाव के बजाय लागत और उपलब्धता पर आधारित है। जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के बाद वैश्विक तेल बाजार की स्थिति में बदलाव आया है। यूरोपीय देश अब मध्य पूर्व से भारी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जो भारत का पारंपरिक स्रोत रहा है। ऐसे में रूस से तेल खरीदना भारत के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन गया।
अमेरिका का भारत से रूसी तेल खरीदने का आग्रह
जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि यदि भारत रूसी तेल नहीं खरीदता, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता आ सकती थी। जिन देशों ने बाद में भारत पर सवाल उठाए, वही उस समय भारत से बाजार को संभालने की उम्मीद कर रहे थे। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत सस्ता और आसानी से उपलब्ध तेल खरीदेगा।
भारत की विदेश नीति का आत्मविश्वास
भारत ने लंबे समय से स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों पर आधारित है। रूस के साथ संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद, नई दिल्ली ने कभी भी दबाव की राजनीति के आगे झुकने के संकेत नहीं दिए। फिनलैंड में जयशंकर का बयान इसी आत्मविश्वास का प्रतीक है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत
यह बयान केवल रूस या तेल खरीद तक सीमित नहीं है। यह उस बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत है जिसमें भारत अब पश्चिमी देशों के दबाव में नहीं चलने वाला। भारत स्पष्ट कर रहा है कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही और नई शक्तियां अपने हितों के आधार पर निर्णय लेंगी। जयशंकर के शब्दों में यही नया भारत है, जो सवालों का सामना करता है और सीधा जवाब देता है।