जयपुर हाईकोर्ट के बाहर वकीलों का धरना समाप्त, 7 मांगों पर बनी सहमति
धरने का समापन और समझौता
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच के बाहर वकीलों का धरना, जो कि 16 फरवरी 2026 से चल रहा था, अब समाप्त हो गया है। यह धरना एक वकील की मां की इलाज में लापरवाही के कारण हुई मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई न होने के विरोध में था। वकीलों ने बुधवार (25 फरवरी 2026) को धरना खत्म करने का निर्णय लिया, जिसके बाद उन्होंने मुख्य सड़क को खोल दिया और आरोपी डॉक्टर का पुतला जलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।
समझौते की मुख्य बातें
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और डीसीपी दक्षिण राजर्षि राज की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। इस समझौते में 7 महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी, जिनमें शामिल हैं:
- राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) में अनियमितताओं की जांच के लिए निविक अस्पताल को 20 दिनों में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाएगा।
- इलाज में लापरवाही के मामले में मेडिकल कॉलेज को मेडिकल बोर्ड गठित करने के लिए लिखा जाएगा।
- जांच पूरी होने तक अस्पताल को अस्थाई रूप से आरजीएचएस पैनल से बाहर करने का पत्र भेजा जाएगा।
- हाईकोर्ट में लंबित याचिका में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की जाएगी।
- डीसीपी दक्षिण की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा, जो एक माह में जांच पूरी करेगा।
- जांच की प्रगति परिवादी को नियमित रूप से बताई जाएगी।
- हर 7 दिन में बार एसोसिएशन को प्रगति रिपोर्ट दी जाएगी।
- सभी दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज की जांच फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से एक माह में कराई जाएगी।
मामले का पृष्ठभूमि
यह धरना अधिवक्ता जीतेन्द्र शर्मा की मां की इलाज में कथित लापरवाही से मौत के मामले से संबंधित था, जिसमें निविक अस्पताल के डॉक्टर सोनदेव बंसल पर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने सितंबर 2025 में एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी न होने के कारण वकील आक्रोशित थे। धरने के कारण हाईकोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रभावित हुआ था।