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जयपुर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़ी स्थिति

जयपुर में सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारियों ने कचरा सड़कों पर फैलाकर चक्काजाम जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, रोजगार सुरक्षा और पूर्व में किए गए वादों का पालन शामिल हैं। जानें इस आंदोलन के पीछे की वजह और इसके प्रभाव के बारे में।
 

जयपुर में सफाई व्यवस्था पर संकट


जयपुर, जिसे गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है, में शनिवार की सुबह सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। संयुक्त वाल्मीकि और सफाई श्रमिक संघ के बैनर तले हजारों सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पहले दिन ही, राजधानी के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में कर्मचारियों का आक्रोश देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों ने छोटी चौपड़ पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कचरा फैलाकर चक्काजाम जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी।


भूख हड़ताल के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल

यूनियन के वरिष्ठ सदस्यों के अनुसार, सफाई कर्मचारी पिछले सात दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर थे। प्रशासन और सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण कर्मचारियों ने सामूहिक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया।


शनिवार सुबह, जब कुछ क्षेत्रों में हूपर और टिपर गाड़ियों को चलाने का प्रयास किया गया, तो बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मी छोटी और बड़ी चौपड़ पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने विरोध स्वरूप कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों को रोककर सारा कचरा मुख्य सड़कों पर पलट दिया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांगें

आंदोलनकारी कर्मचारी मुख्य रूप से छह सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:



  1. पारदर्शी सफाई भर्ती: सरकार के साथ हुए समझौतों के अनुसार सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया को जल्द और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।

  2. रोजगार सुरक्षा और अधिकार: वाल्मीकि समाज के परंपरागत सफाई अधिकारों की रक्षा की जाए और संविदा व आउटसोर्सिंग प्रथा पर रोक लगे।

  3. लंबित वादे: ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम प्रशासन द्वारा पूर्व में स्वीकृत मांगों को तुरंत लागू किया जाए।