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जयपुर में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी के दौरान 140 से अधिक लोग घायल

जयपुर में मकर संक्रांति के उत्सव के दौरान पतंगबाजी से जुड़े हादसों ने 140 से अधिक लोगों को घायल कर दिया। चाइनीज मांझे के कारण हुए इन हादसों में कई गंभीर चोटें आई हैं। अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ती जा रही है, और कुछ मौतें भी हुई हैं। इस लेख में हम हादसों के कारण, प्रभावित लोगों की संख्या और सुरक्षा उपायों पर चर्चा करेंगे।
 

मकर संक्रांति के दौरान हादसे

2026 में मकर संक्रांति के उत्सव के दौरान जयपुर में पतंगबाजी से जुड़े हादसों ने पूरे समारोह को प्रभावित किया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, चाइनीज मांझे से कटने, छत से गिरने, सिर में चोट लगने और अन्य कारणों से 140 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ये आंकड़े 14 और 15 जनवरी 2026 के हैं, जब मकर संक्रांति का मुख्य उत्सव मनाया गया।


अस्पतालों में घायलों की संख्या

अस्पतालों में पहुंचे घायल:



  • जयपुरिया हॉस्पिटल: बुधवार को 50 मरीज आए, जिनमें अधिकांश मांझे से कटने और गिरने के मामले थे।

  • गणगौरी हॉस्पिटल: 31 घायल इलाज के लिए भर्ती हुए।

  • एसएमएस ट्रॉमा सेंटर: 32 घायल पहुंचे, जहां कई गंभीर मामलों में सर्जरी की गई। यहां सिर की चोटें, फ्रैक्चर और गर्दन/चेहरे के कटने के मामले अधिक थे।

  • कांवटिया हॉस्पिटल: 30 घायल पहुंचे।


कुल मिलाकर विभिन्न अस्पतालों में 140 से अधिक घायलों की पुष्टि हुई है, जिनमें बच्चे और युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। कुछ रिपोर्टों में कुल घायलों की संख्या 150 तक बताई गई है।


मुख्य कारण और अन्य घटनाएं

मुख्य कारण:



  • चाइनीज मांझा (ग्लास या मेटल कोटेड) सबसे बड़ा खतरा साबित हुआ, जो गर्दन, चेहरा और हाथ काट देता है। कई मामलों में बाइक सवारों की गर्दन कट गई।

  • छत से गिरने, पतंग लूटते समय विवाद और बिजली लाइनों में उलझने से भी हादसे हुए।

  • प्रदेश में कुल 4 मौतें रिपोर्ट की गईं, जिनमें जयपुर में एक बच्चे की गर्दन कटने से मौत शामिल है। इसके अलावा, सैकड़ों पक्षी भी घायल या मारे गए।

  • जयपुर में काइट फेस्टिवल-2026 का आयोजन हुआ, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने पतंग उड़ाई, लेकिन हादसों ने उत्सव को प्रभावित किया।


सावधानियां और सलाह

सावधानियां:



  • केवल पारंपरिक सूती मांझा का उपयोग करें, चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है।

  • छतों पर रेलिंग या सुरक्षा के बिना पतंग न उड़ाएं।

  • बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट पहनें और गर्दन को ढकें, साथ ही लटकते मांझे से सावधान रहें।

  • अस्पतालों में विशेष व्यवस्था की गई थी, लेकिन रोकथाम ही सबसे बेहतर उपाय है।