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जयपुर में एलपीजी संकट: ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर संकट

जयपुर में एलपीजी की कमी ने ऑटो चालकों की रोजी-रोटी को संकट में डाल दिया है। शहर में लंबी कतारें और बढ़ते किराए ने यात्रियों को भी परेशान किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दुरुपयोग और वैश्विक आपूर्ति चेन में व्यवधान के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ऑटो यूनियन ने प्रशासन से अलग कोटा की मांग की है। राजनीतिक नेताओं ने भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
 

जयपुर में एलपीजी संकट की गंभीरता


जयपुर, 15 मार्च 2026 — हाल के दिनों में राजधानी जयपुर में एलपीजी (ऑटो गैस) की कमी ने शहर की सड़कों पर स्पष्ट रूप से असर डाला है। घरेलू रसोई में गैस सिलेंडर की कमी से लोग परेशान हैं, वहीं एलपीजी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा चालकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। शहर में लगभग 10,000 एलपीजी ऑटो हैं, जिनमें से करीब 5,000 इस समय सड़कों पर नहीं चल पा रहे हैं। कई चालक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें केवल 7 किलो गैस मिलती है, जिसके लिए उन्हें लगभग 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।


पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें

शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों जैसे 22 गोदाम, न्यू आतीश मार्केट के सामने, सी-स्कीम और अन्य स्थानों पर ऑटो-रिक्शा की कतारें 2 से 3 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। चालकों को औसतन 3 से 4 घंटे, कई बार 6 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। गैस की सीमित मात्रा के कारण चालक को भराई के बाद केवल एक-दो घंटे की कमाई ही हो पाती है। कई चालक बताते हैं कि दिनभर लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है, क्योंकि गैस की सप्लाई खत्म हो जाती है।


ऑटो चालकों की मुश्किलें

महेश यादव (नाम बदलकर) ने कहा, "सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े हैं। अब दोपहर हो गई, लेकिन अभी बारी नहीं आई। अगर 500 रुपये की गैस भी मिल गई तो क्या फायदा? पहले 800-1000 रुपये की कमाई होती थी, अब मुश्किल से 300-400 रुपये बचते हैं। घर चलाना मुश्किल हो गया है।"


किराया बढ़ने से यात्रियों को भी परेशानी

एलपीजी की कमी से प्रभावित चालकों के अलावा, पेट्रोल-डीजल ऑटो चालकों ने भी किराया 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। पहले 50 रुपये का सफर अब 60-70 रुपये में हो रहा है। यात्रियों का कहना है कि ऑटो कम मिल रहे हैं और किराया भी ज्यादा है। स्कूल जाने वाले बच्चे, बाजार जाने वाली महिलाएं और ऑफिस जाने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर ऑटो न मिलने के कारण लोग पैदल या साझा यात्रा करने को मजबूर हैं।


संकट के कारण

विशेषज्ञों और ऑटो यूनियन के अनुसार, यह संकट मुख्य रूप से घरेलू गैस सिलेंडर के दुरुपयोग पर प्रशासन की सख्ती के कारण उत्पन्न हुआ। कई लोग घरेलू सिलेंडर से ऑटो में गैस भरवा रहे थे, जिस पर रोक लगने से कमर्शियल एलपीजी की मांग अचानक बढ़ गई। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण आयात प्रभावित हुआ है। जयपुर में कई पंपों पर सप्लाई एक-दो दिन के लिए पूरी तरह बंद हो गई। ऑटो यूनियन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि एलपीजी ऑटो चालकों के लिए अलग कोटा तय किया जाए और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस नेता प्रतीक खाचरियावास ने इस संकट को लेकर गैस सिलेंडर की 'शवयात्रा' निकाली और कहा कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि 10,000 से अधिक प्रभावित ऑटो चालकों के लिए अलग फंड जारी किया जाए और गरीब परिवारों को भी राहत दी जाए। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और जल्द ही सप्लाई सामान्य हो जाएगी।


निष्कर्ष

जयपुर का यह संकट अब केवल गैस की कमी नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और आम जनजीवन पर गहरा असर डाल रहा है। यदि जल्द ही पर्याप्त सप्लाई नहीं हुई, तो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ सकती है। चालक संघ और आम लोग अब सरकार से त्वरित राहत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि शहर की सड़कें फिर से ऑटो की आवाज से गूंज उठें।