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जयपुर के एसएमएस अस्पताल में दवाओं की गंभीर कमी, मरीजों को महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर

जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में दवाओं की गंभीर कमी ने मरीजों को संकट में डाल दिया है। पिछले एक महीने से दवाओं की आपूर्ति ठप है, जिसके कारण मरीजों को महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज आते हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। दवाओं की अनुपलब्धता के कारण कई मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। प्रशासन से मांग की गई है कि दवाओं की आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए।
 

दवाओं की कमी से परेशान मरीज


जयपुर, 5 मार्च 2026: राजस्थान के प्रमुख सरकारी अस्पताल सवाई मान सिंह (एसएमएस) में दवाओं की गंभीर कमी ने मरीजों को संकट में डाल दिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक महीने से अधिक समय से राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) से दवाओं की आपूर्ति ठप है, जिसके कारण 50 से अधिक आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।


बीपी, शुगर, हार्ट, थायरॉइड, अस्थमा, डिप्रेशन और एपिलेप्सी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं, जैसे Dapagliflozin, Aspart Insulin, Aspirin, Nicoumalone, Levothyroxine, Pantop 40, Duloxetine, लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, सामान्य दवाएं जैसे खांसी-बुखार की दवाएं, कफ सिरप, एंटीबायोटिक्स और बच्चों की दवाएं भी अस्पताल के काउंटरों पर नहीं मिल रही हैं।


एसएमएस अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 8,000 से अधिक ओपीडी मरीज आते हैं, जिनमें से लगभग 60% ग्रामीण क्षेत्रों से होते हैं। दवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। खासकर, अस्पताल के काउंटर नंबर 11 और 12 के आसपास कुछ प्राइवेट दुकानों के एजेंट सक्रिय हैं, जो मरीजों को पर्ची दिखाकर बाहर ले जाकर दवाएं बेच रहे हैं। यह स्थिति दवाओं के काले कारोबार की ओर इशारा कर रही है।


फार्मासिस्टों और कर्मचारियों के अनुसार, RMSCL को कई बार दवाओं की मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो रही है। स्थानीय स्तर पर भी रेट कॉन्ट्रैक्ट न होने के कारण दवाओं की खरीद नहीं हो पा रही है, जिससे आईपीडी मरीजों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी संदेह पैदा करता है कि क्या जानबूझकर दवाओं को छिपाया जा रहा है ताकि मरीज बाहर से खरीदने के लिए मजबूर हों। प्रशासन से मांग की गई है कि दवाओं की आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए और ऐसे किसी भी काले खेल पर सख्त कार्रवाई की जाए।


मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार से अपील की है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में मुफ्त दवाओं की यह किल्लत जल्द समाप्त हो, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को और परेशानी न झेलनी पड़े।