जयपुर के अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ का विरोध: निलंबन के खिलाफ कार्य बहिष्कार
नर्सिंग कर्मचारियों का आक्रोश
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में पिछले साल अक्टूबर में हुई भयंकर आग की घटना के बाद नर्सिंग स्टाफ में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जांच रिपोर्ट में स्टाफ की लापरवाही के खुलासे के बाद चार नर्सिंग कर्मचारियों, जिनमें एक नर्सिंग अधीक्षक भी शामिल है, को निलंबित किया गया है। इस निर्णय के खिलाफ नर्सिंग स्टाफ ने कड़ा रुख अपनाया है।
आज ट्रॉमा सेंटर में आयोजित दो घंटे की गेट मीटिंग में सभी नर्सिंग कर्मचारियों ने गहन चर्चा की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कल से एसएमएस अस्पताल के मुख्य भवन और जयपुर के अन्य अस्पतालों में भी दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान नर्सिंग कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक विरोध को दर्ज कराएंगे।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि चार साथियों का निलंबन पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और एकतरफा कार्रवाई है। उन्होंने मांग की है कि निलंबन को तुरंत वापस लिया जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
बैठक में सभी सदस्यों से अपील की गई कि वे एकजुट रहें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। नर्सिंग समुदाय ने इसे ऐतिहासिक एकजुटता का मामला बताया है और कहा है कि सिस्टम की नाकामी को छिपाने के लिए केवल नर्सिंग स्टाफ को निशाना बनाया जा रहा है।
यह घटना अक्टूबर 2025 में ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू में लगी आग से संबंधित है, जिसमें 6 से 8 मरीजों की जान गई थी। जांच रिपोर्ट में चाबी खोजने में 30 मिनट लगने, स्टाफ के भागने और अन्य गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिसके बाद कार्रवाई की गई। अब नर्सिंग कर्मचारी इसे अन्याय मानते हुए अपना विरोध तेज कर रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ सकता है।