जयपुर का नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: बाघों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क की विशेषताएँ
(अविनाश बाकोलिया) जयपुर, 28 जुलाई - नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, बाघों के संरक्षण के लिए राजस्थान का एक महत्वपूर्ण प्राणी उद्यान बनकर उभरा है। राज्य के चार प्रमुख पार्कों में कुल 18 बाघों में से 14 बाघ, बाघिन और उनके शावक इसी उद्यान में निवास करते हैं, जैसा कि अधिकारियों ने मंगलवार को बताया।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर विशेष जानकारी
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) के अवसर पर, अधिकारियों ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान अन्य जैविक उद्यानों से अलग है। यहां 14 बाघ-बाघिन और शावक हैं, जिनमें सफेद बाघ और नवजात शावक शामिल हैं। यह सफल प्रजनन कार्यक्रम न केवल वन्यजीव संरक्षण की कहानी बयां करता है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बनाता है।
बाघों की संख्या और प्रजातियाँ
वन विभाग के अनुसार, नाहरगढ़ जैविक उद्यान में 4 बाघ, 4 बाघिन और 6 शावक हैं। राज्य के अन्य उद्यानों में उदयपुर का सज्जनगढ़, जोधपुर का माचिया और कोटा का अभेड़ा जैविक उद्यान शामिल हैं, जहां विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है। सहायक वन संरक्षक जितेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि यहां बाघ शिवाजी, बाघिन रानी और उनके पांच शावक हैं।
शावकों की सुरक्षा
चूंकि शावकों की उम्र अभी कम है, उन्हें पर्यटकों के लिए प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है। उन्हें सुरक्षित वातावरण में विकसित होने के लिए रखा गया है। टाइगर सफारी में बाघ गुलाब, सफेद बाघ भीम, बाघिन भक्ति, चमेली और स्कंदी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
विशेष देखभाल की आवश्यकता
रणथम्भौर बाघ अभयारण्य से रेस्क्यू कर लाया गया बाघ रणवीर भी यहां है, जिसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है। शेखावत ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान की एक और खासियत यहां मौजूद सफेद बाघ भीम है, जो सामान्य बाघों की तुलना में दुर्लभ माने जाते हैं।
पर्यटन में वृद्धि
अधिकारियों के अनुसार, उद्यान में सबसे कम उम्र का शावक केवल तीन माह का है, जबकि सबसे वरिष्ठ बाघ शिवाजी की उम्र लगभग नौ वर्ष है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न आयु वर्ग के बाघों का होना स्वस्थ संरक्षण प्रणाली का संकेत है।
नाहरगढ़ टाइगर सफारी का महत्व
नाहरगढ़ टाइगर सफारी पर्यटन के लिहाज से भी लगातार लोकप्रिय हो रही है। जयपुर आने वाले पर्यटक यहां ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ बाघों को देखने का रोमांच भी अनुभव करते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 से जून 2026 के बीच 24,882 पर्यटकों ने नाहरगढ़ टाइगर सफारी का भ्रमण किया, जिससे 5 करोड़ 17 लाख 6 हजार 400 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।
भविष्य की संभावनाएँ
वन विभाग का मानना है कि सफारी की सुविधाओं और पर्यटक प्रबंधन में सुधार से आने वाले वर्षों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक उद्यान केवल वन्यजीवों के प्रदर्शन का स्थान नहीं हैं, बल्कि संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, प्रजनन, उपचार और जन-जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।