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जय सोमनाथ पुस्तक पर गोष्ठी: सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव

नई दिल्ली में आयोजित एक गोष्ठी में 'जय सोमनाथ' पुस्तक पर चर्चा की गई, जिसमें साहित्यकारों ने इसकी सांस्कृतिक महत्वता और विजय की भावना पर प्रकाश डाला। सुरेन्द्र अरोड़ा, कुमार सुबोध और अन्य ने इस पुस्तक को भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक बताया। गोष्ठी में यह भी बताया गया कि 2026 में महमूद गजनवी के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस अवसर पर भारत सरकार 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन कर रही है।
 

जय सोमनाथ पुस्तक पर चर्चा

सोमवार को नई दिल्ली के प्रवासी भवन में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की पुस्तक 'जय सोमनाथ' पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।




इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र अरोड़ा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि 'जय सोमनाथ' हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने इसे आत्मसम्मान और विजय की भावना का प्रतीक बताया और कहा कि इसे हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने असली दुश्मनों को पहचानने की आवश्यकता है, क्योंकि युद्ध का समाधान केवल युद्ध ही है।




प्रसिद्ध लेखक कुमार सुबोध ने इस उपन्यास को गजनवी के आक्रमण के समय सोमनाथ मंदिर के विनाश और पुनर्निर्माण की महागाथा के रूप में वर्णित किया। वहीं, साहित्यकार सारिका कालरा ने कहा कि इस पुस्तक में चौलादेवी और भीमदेव जैसे पात्रों के माध्यम से प्रेम, त्याग और राष्ट्रभक्ति को खूबसूरती से दर्शाया गया है। लेखिका प्रिया वरुण कुमार ने बताया कि मुंशी जी ने 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए आक्रमण का जीवंत चित्रण किया है, जिसमें इतिहास और कल्पना का अद्भुत मेल है।




पत्रकार राजीव कुमार ने इस कृति को भारतीय सांस्कृतिक पहचान के पुनरुत्थान का प्रतीक बताया। गोष्ठी का संचालन करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी अंकित दूबे ने कहा कि कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने 'जय सोमनाथ' के रूप में एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा है। वर्ष 2026 में महमूद गजनवी के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, जिसे भारत सरकार 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के रूप में मनाने जा रही है। यह पर्व प्रतिक्रिया का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंतता का उत्सव है। भारत 5000 वर्षों से अधिक समय से एक जीवंत सभ्यता के रूप में प्रवाहित हो रहा है।




इस गोष्ठी में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, साहित्यकार चन्दन कुमार, राजीव कुमार, महेशानन्द, अवंतिका यादव और वेदव्रत शर्मा भी उपस्थित थे।