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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राजनीतिक टकराव और क्षेत्रीय मुद्दों की चर्चा

आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राजनीतिक टकराव और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच गरमागरम बहस हुई। भाजपा ने जम्मू में एनएलयू की स्थापना की मांग की, जबकि विपक्ष ने कश्मीरियों के उत्पीड़न के मामलों को उठाया। सदन में हंगामे के बीच, विधायक सुरक्षा और राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे थे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सुरक्षा और पहचान के मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
 

विधानसभा में गरमागरम बहस

आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और सामाजिक मुद्दों के बीच बहस हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू क्षेत्र में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) की स्थापना की मांग की, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कश्मीरियों के उत्पीड़न के मामलों को उठाते हुए सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। इन मुद्दों ने सदन के भीतर और बाहर हलचल पैदा कर दी।


भाजपा की मांग और विपक्ष की प्रतिक्रिया

जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायक सुरजीत सिंह सलाथिया ने जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों की एनएलयू की स्थापना की मांग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कश्मीर में एनएलयू के खिलाफ नहीं है, लेकिन जम्मू के छात्रों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उनके बोलते ही अन्य भाजपा विधायक भी खड़े हो गए और 'जम्मू के लिए एनएलयू' के नारे लगाते हुए तख्तियां दिखाईं, जिससे सदन में शोरगुल मच गया। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखने पर सहमति बनी थी।


सदन में उठे गंभीर मुद्दे

हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने प्रश्नकाल जारी रखा। इसी दौरान पीडीपी विधायक वहीद-उर-रहमान पारा ने कश्मीरियों के खिलाफ 'घृणा अपराध' की घटनाओं पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव रखा, जिसे अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे अन्य संसदीय माध्यमों से उठाए जा सकते हैं।


कश्मीरियों की सुरक्षा पर चिंता

नेकां विधायक मुबारक गुल और सैफुल्लाह मीर ने आरोप लगाया कि कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और कामगारों को देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। मीर ने कहा कि कई जगहों पर कश्मीरियों को अपने घरों से बाहर निकलने में डर लग रहा है। पीडीपी के पारा ने भी इस विषय पर चर्चा की आवश्यकता जताई और कहा कि बढ़ती घटनाएं कश्मीरियों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं।


विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन

इन मुद्दों की गूंज विधानसभा परिसर के बाहर भी सुनाई दी। सत्र शुरू होने से पहले नेकां के विधायकों ने राज्य का दर्जा बहाल करने और कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर धरना दिया। उनके हाथों में 'राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करो' जैसे पोस्टर थे। नेकां नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था, और अब उस वादे को पूरा करने का समय आ गया है।


राजनीतिक संतुलन और सुरक्षा के मुद्दे

आज के घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में क्षेत्रीय संतुलन, पहचान और सुरक्षा के मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। जम्मू के लिए शैक्षणिक संस्थानों की मांग क्षेत्रीय विकास की आकांक्षा को दर्शाती है, जबकि कश्मीरियों की सुरक्षा और राज्य का दर्जा बहाली का प्रश्न राजनीतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर गूंज रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।