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जम्मू-कश्मीर में ईद पर राजनीतिक विवाद और धार्मिक उत्सव

जम्मू-कश्मीर में ईद-उल-फितर का उत्सव पारंपरिक तरीके से मनाया गया, लेकिन इस अवसर पर राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ईरान और अन्य देशों के लिए दुआ की, जबकि कश्मीर की सड़कों पर खामेनई के समर्थन में नारेबाजी हुई। जामा मस्जिद में नमाज पर रोक और सुरक्षा बलों की तैनाती ने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया। जानें इस विवाद और उत्सव के बारे में विस्तार से।
 

ईद पर महबूबा मुफ्ती की राजनीतिक बयानबाजी

जम्मू-कश्मीर में ईद के मौके पर राजनीतिक गतिविधियों का एक नया दौर देखने को मिला। पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने इस अवसर पर मिठास में कड़वाहट घोलने की कोशिश की और फिलस्तीन, लेबनान और ईरान के लोगों के लिए दुआ की। लेकिन उन्होंने उन भारतीयों के दर्द को नजरअंदाज किया, जो खाड़ी में ईरानी हमलों का शिकार हुए हैं।


कश्मीर में खामेनई के समर्थन में नारेबाजी

कश्मीर की सड़कों पर आज भी ईरान के मारे गए नेता खामेनई के समर्थन में नारे लगाए गए। यह देखकर सवाल उठता है कि भारत विरोधी खामेनई के लिए कश्मीर में मातम क्यों मनाया जा रहा है? क्या यहां का माहौल बिगाड़ने की कोशिशें चल रही हैं?


ईद-उल-फितर का पारंपरिक उत्सव

वहीं, कश्मीर में ईद-उल-फितर का उत्सव पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया गया। डल झील के किनारे हजरतबल दरगाह में मुस्लिम समुदाय ने नमाज अदा की और एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। हालांकि, अधिकारियों ने श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी। हजरतबल में 50,000 से अधिक अकीदतमंदों ने सजदे में सिर झुकाया, जो कश्मीर में ईद की सबसे बड़ी सामूहिक नमाज़ थी।


जामा मस्जिद में नमाज पर रोक

श्रीनगर के नौहट्टा क्षेत्र में जामा मस्जिद के आसपास सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी, ताकि नमाज के लिए भीड़ न जुट सके। अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने पहले ही घोषणा की थी कि ईद की नमाज जामा मस्जिद में अदा की जाएगी और अधिकारियों से इस पर कोई प्रतिबंध न लगाने का अनुरोध किया था।


मुख्य धर्मगुरु का बयान

कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “सातवें वर्ष भी जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक जारी है। यह दिन मुसलमानों के लिए गम और वंचना में बदल गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग हमारी मस्जिदों के दरवाजों पर ताले लगाते हैं, वही हमें ‘ईद मुबारक’ कहने आते हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस पर अफसोस जताया कि जामा मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई।