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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहा निर्णायक अभियान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा 'ऑपरेशन शेरुवाली' आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक अभियान है। यह अभियान पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें सुरक्षा बल संदिग्ध आतंकियों की खोज में जंगलों की गहन छानबीन कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य आतंकियों को सुरक्षित रास्ता नहीं देना है, और इलाके में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। जानें इस अभियान की पूरी जानकारी और सुरक्षा बलों की रणनीतियों के बारे में।
 

राजौरी और पुंछ में आतंकवाद के खिलाफ अभियान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ के पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ चल रही घेराबंदी अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। घने जंगल, कठिन पहाड़ियां और नियंत्रण रेखा के निकट संवेदनशील क्षेत्र इस समय सुरक्षा बलों की चौकसी में हैं। राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर में गंभीर मुगलान और दोरीमल के जंगलों में शुरू किया गया संयुक्त आतंक विरोधी अभियान अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल उच्च बना हुआ है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम लगातार संदिग्ध आतंकियों की खोज में जंगलों की गहन छानबीन कर रही है।




इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन शेरुवाली' रखा गया है, जो खुफिया सूचनाओं पर आधारित है। सुरक्षा एजेंसियों को इन क्षेत्रों में आतंकियों की उपस्थिति के स्पष्ट संकेत मिले थे, जिसके बाद व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा बलों की रणनीति यह है कि आतंकियों को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रास्ता नहीं मिलना चाहिए। इसी कारण, इलाके में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। यात्रियों और स्थानीय निवासियों के पहचान पत्रों की भी जांच की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।




हालांकि, यह अभियान आसान नहीं है। गंभीर मुगलान और दोरीमल के जंगल अपने घने वन क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये इलाके आतंकियों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह माने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा बलों ने आधुनिक निगरानी तंत्र और लगातार दबाव बनाकर आतंकियों की हर गतिविधि पर नजर रखी है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां इलाके में आतंकियों की आवाजाही को रोकने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर रही हैं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत कर दिया गया है कि बिना जांच किसी को भी संवेदनशील इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही।




इसी बीच, पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा से लगे अग्रिम क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। राजौरी-पुंछ रेंज के उप महानिरीक्षक संदीप वजीर ने सवजियां और आंगनपथरी जैसे संवेदनशील अग्रिम क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की बल्कि अभियानगत तैयारियों का भी सीधा आकलन किया। सीमा से सटे इन इलाकों का रणनीतिक महत्व बेहद अहम माना जाता है क्योंकि आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें अक्सर इन्हीं रास्तों से होती रही हैं।




दौरे के दौरान डीआईजी ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात पुलिसकर्मियों से बातचीत की और उन्हें किसी भी उभरते खतरे से निपटने के लिए पूरी सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा तथा सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को हर हाल में बनाए रखना होगा। यह संदेश भी स्पष्ट था कि आतंक के खिलाफ जंग केवल बंदूक से नहीं, बल्कि मजबूत समन्वय और निरंतर सतर्कता से जीती जाती है।




डीआईजी ने ग्राम रक्षा गार्ड के सदस्यों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में स्थानीय लोगों की भूमिका की सराहना की। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि सीमा क्षेत्रों में आतंक के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार स्थानीय जनता का विश्वास और सहयोग ही है।




बहरहाल, राजौरी और पुंछ के जंगलों में जारी यह अभियान केवल आतंकियों की तलाश भर नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की उस निर्णायक लड़ाई का हिस्सा है जिसमें सुरक्षा बल हर चुनौती का डटकर सामना कर रहे हैं। दुर्गम पहाड़ियां हों या सीमा पार से मंडराता खतरा, सुरक्षा एजेंसियों का संदेश स्पष्ट है कि आतंक के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा।