जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आगा रुहुल्लाह मेहदी का बड़ा फैसला
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलचल
3 नवंबर को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना घटी है। श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से अपने संबंध तोड़ने और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय से चल रहे मतभेदों के कारण उनका यह कदम जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रुहुल्लाह मेहदी अपनी नई राजनीतिक ताकत स्थापित करेंगे या किसी नए मंच के माध्यम से आगे बढ़ेंगे।
अनुच्छेद 370 और चुनावी वादों पर असहमति
रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मतभेद पिछले एक साल से बढ़ते जा रहे थे। उन्होंने पार्टी पर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, चुनाव में अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन सरकार बनने के बाद इन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि पार्टी को अपने चुनावी वादों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
24 साल पुराना रिश्ता समाप्त
आगा रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस से लगभग 24 वर्षों का राजनीतिक संबंध रहा है। वह पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक थे और 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार भी किया। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने श्रीनगर सीट से जीत हासिल की थी।
हालांकि, सरकार बनने के बाद आरक्षण नीति और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर उनकी पार्टी से असहमति बढ़ने लगी। यह मतभेद धीरे-धीरे सार्वजनिक बयानबाजी और पार्टी नेतृत्व की आलोचना तक पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने पार्टी और संसद दोनों से अलग होने का निर्णय लिया।
नई पार्टी की बजाय राजनीतिक आंदोलन पर जोर
रुहुल्लाह मेहदी के अगले कदम को लेकर जम्मू-कश्मीर में चर्चा तेज है। हालांकि, उन्होंने तुरंत नई राजनीतिक पार्टी बनाने की योजना नहीं बनाई है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि 3 नवंबर के बाद वह एक संगठित राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने का प्रयास करेंगे। उनका उद्देश्य एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था बनाना है, जिसमें व्यक्तिगत नेताओं के बजाय विचारों, सिद्धांतों और राजनीतिक चरित्र को महत्व दिया जाए।
इसलिए, फिलहाल उनके अगले कदम को नई पार्टी के गठन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। उनका इरादा एक ऐसा राजनीतिक आंदोलन तैयार करना है, जो विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर ला सके।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए राजनीतिक प्रभाव
रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी छोड़ना नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। वह श्रीनगर से सांसद होने के साथ-साथ कश्मीर की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनके अलग होने से पार्टी के भीतर असहमति और नेतृत्व के सामने मौजूद चुनौतियों पर फिर से चर्चा तेज हो सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रुहुल्लाह के साथ कोई अन्य नेता या जनप्रतिनिधि भी जुड़ता है। साथ ही, उनका प्रस्तावित राजनीतिक आंदोलन किस स्वरूप में सामने आता है और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उसकी क्या भूमिका रहती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
लोकसभा सीट पर नजर
रुहुल्लाह मेहदी ने श्रीनगर लोकसभा सीट छोड़ने का निर्णय भी लिया है। हालांकि, इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया और उसकी स्वीकृति अलग संसदीय प्रक्रियाएं हैं। यदि उनका इस्तीफा स्वीकार होता है, तो श्रीनगर सीट खाली होगी और उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।
कुल मिलाकर, आगा रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होना जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ है। अब यह देखना होगा कि उनका राजनीतिक आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इससे प्रदेश में कोई नया सियासी मंच तैयार होता है।