जब लेडी कर्ज़न ने भारतीय राजाओं को किया प्रभावित, जानें शिमला की दावत की कहानी
राजाओं की भव्यता और लेडी कर्ज़न का आकर्षण
भारतीय राजाओं की शान और दरियादिली अद्वितीय थी। जब भी कोई उनके प्रति मेहरबान होता, वे उसे सब कुछ देने में संकोच नहीं करते थे। पटियाला के महाराजा राजिंदर सिंह, कपूरथला के महाराजा जगजीत सिंह और धौलपुर के महाराजा राणा ने लेडी कर्ज़न पर ऐसा जादू चलाया कि वह बिना अपने पति, वायसराय लार्ड कर्ज़न की अनुमति के, एक शाम शिमला में इन राजाओं की मेहमान बन गईं। उन्होंने राजाओं की इच्छा पर साड़ी पहनी और उन्हें उपहार स्वीकार किए। इस पार्टी की तस्वीरें लंदन के समाचार पत्रों में छपीं, जिससे लॉर्ड कर्ज़न बेहद नाराज हुए और उन्होंने राजाओं के शिमला जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता का आदेश जारी किया।
शिमला में राजाओं की मौज-मस्ती
गर्मियों में शिमला की ठंडी वादियां न केवल अंग्रेजों को, बल्कि देसी राजाओं को भी भाती थीं। जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू होता, समृद्ध राजा अपने पूरे लवाजमे के साथ शिमला की ओर बढ़ते थे। यहां वे मौज-मस्ती और सैर का आनंद लेते थे, जो उन्हें अंग्रेजी अधिकारियों और उनकी बीवियों के साथ घुलने-मिलने का अवसर प्रदान करता था। वायसराय लार्ड कर्ज़न विशेष रूप से पटियाला और कपूरथला के महाराजाओं पर मेहरबान थे।
लेडी कर्ज़न की दावत और कर्ज़न का गुस्सा
लेडी कर्ज़न की पटियाला और कपूरथला के महाराजाओं के साथ घनिष्ठता इतनी बढ़ गई कि उन्होंने एक शाम की दावत में लेडी कर्ज़न को अकेले ही आमंत्रित किया। इस दावत में धौलपुर के महाराजा राणा भी शामिल थे। लेडी कर्ज़न ने राजाओं की इच्छा पर अपने पारंपरिक परिधान के बजाय साड़ी पहनी और उन्हें रत्नजड़ित मुकुट पहनाया। इस दावत के दृश्य फोटोग्राफरों ने कैद किए, जो बाद में लंदन और भारत के समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए। लॉर्ड कर्ज़न इस सब से नाराज हुए और उन्होंने देसी राजाओं के शिमला में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी।
चैल का निर्माण और राजाओं की नई राजधानी
लॉर्ड कर्ज़न के गुस्से के जवाब में, महाराजा पटियाला राजिंदर सिंह ने शिमला-कालका रोड पर चैल नामक एक नया शहर बसाया। उन्होंने इसे अपनी रियासत की गर्मियों की राजधानी बना दिया। चैल, शिमला से चालीस मील की दूरी पर स्थित है, और यहां एक खूबसूरत खेल मैदान भी बनाया गया। यहां क्रिकेट मैच आयोजित होते थे, जिसमें ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय टीमें भाग लेती थीं।
महाराजा मान सिंह और महारानी एलिजाबेथ का संबंध
इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की जयपुर के महाराजा मान सिंह के साथ निकटता थी, जिससे वह उन्हें घरेलू नाम 'लिजी' से संबोधित करती थीं। आजादी के बाद, महारानी के कार्यक्रमों में महाराजा को प्राथमिकता दी गई, जिससे राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया और अन्य मंत्रियों में नाराजगी फैल गई।
नेहरू का गुस्सा और राजाओं की स्थिति
मुख्यमंत्री सुखाड़िया ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को इस मामले की शिकायत की। नेहरू ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और महारानी के भारत दौरे के दौरान राजाओं को एक विलुप्त होती प्रजाति के रूप में संदर्भित किया। दीवान जरमनी दास ने नेहरू को यह कहते हुए सुना कि अब राजाओं का समय समाप्त हो चुका है और उन्हें आम नागरिकों की तरह ही अधिकार प्राप्त हैं।