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जन्माष्टमी पर जालोर में सड़क हादसे ने परिवार को दिया गहरा सदमा

जालोर जिले में जन्माष्टमी के अवसर पर एक दुखद सड़क हादसे ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। चाचा और उनके डेढ़ साल के भतीजे की बाइक एक खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिससे दोनों की जान चली गई। यह घटना न केवल परिवार के लिए एक बड़ा नुकसान है, बल्कि सड़क पर खड़े भारी वाहनों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाती है। जानें इस हादसे की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

जन्माष्टमी की खुशियां मातम में बदल गईं


राजस्थान के जालोर जिले में जन्माष्टमी का त्योहार एक परिवार के लिए दुखदायी बन गया। शुक्रवार रात, प्रसाद लेकर लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में चाचा और उनके डेढ़ साल के भतीजे की जान चली गई। दोनों की बाइक एक खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई।


प्रसाद के साथ लौटते समय हुआ हादसा

पुलिस के अनुसार, निबलाना के निवासी 25 वर्षीय दशरथ जन्माष्टमी के अवसर पर मिठाई और फल लेने के लिए बाइक पर निकले थे। उनके साथ उनका डेढ़ साल का भतीजा हिमांशु भी था। दोनों प्रसाद लेकर अपने गांव लौट रहे थे।


यह दुर्घटना बिशनगढ़ थाना क्षेत्र में मांडवला टोल नाके के पास शुक्रवार रात लगभग 8:30 बजे हुई। बताया गया कि सड़क पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी थी और अंधेरे के कारण बाइक उससे टकरा गई। इस हादसे में दोनों की मृत्यु हो गई।


मासूम की चाचा के साथ जाने की जिद

परिवार के सदस्यों के अनुसार, हिमांशु अपने चाचा दशरथ के बहुत करीब था और अक्सर उनके साथ रहता था। जन्माष्टमी के दिन, जब दशरथ घर से बाहर निकल रहे थे, तो मासूम उनके साथ जाने के लिए रोने लगा। इसके बाद वह चाचा के साथ बाइक पर चला गया।


कुछ ही समय बाद हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।


पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। शनिवार सुबह पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने बाइक और ट्रैक्टर-ट्रॉली को अपने कब्जे में लेकर दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।


परिवार में शोक का माहौल

दशरथ गांव में खेती का काम करते थे, जबकि हिमांशु के पिता भी किसान हैं। एक ही हादसे में परिवार के दो सदस्यों की मौत से घर में शोक का माहौल है।


यह घटना रात के समय सड़क पर खड़े भारी वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाती है। सड़क पर वाहन खड़ा करते समय उचित रोशनी और चेतावनी संकेतों का होना आवश्यक है, ताकि पीछे से आने वाले वाहन चालकों को खतरे का समय पर पता चल सके।