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जनरल वी.के. सिंह का 74वां जन्मदिन: एक बहुमुखी नेता की कहानी

आज, 10 मई को, जनरल वी.के. सिंह अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक बहुमुखी नेता, जिन्होंने आर्मी अफसर से केंद्रीय मंत्री बनने तक का सफर तय किया। जानें उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ, सैन्य सेवा और उपलब्धियाँ। उनका योगदान और अनुभव भारतीय सेना के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
 

वी.के. सिंह का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

आज, 10 मई को, पूर्व सेना प्रमुख और राजनेता जनरल वी.के. सिंह अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। आर्मी अफसर से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का उनका सफर बहुमुखी प्रतिभा का परिचायक है। वह पहले सैन्य प्रमुख हैं जिन्होंने कमांडो प्रशिक्षण प्राप्त किया। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं।


प्रारंभिक जीवन

वी.के. सिंह का जन्म 10 मई 1951 को हरियाणा के भिवानी जिले के बापोरा गांव में हुआ। उनके पिता सेना में कर्नल थे और दादा जूनियर कंडीशन ऑफिसर। शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्हें 17 जून 1970 को राजपूत रेजीमेंट की दूसरी बटालियन में कमीशन मिला। उस समय यह यूनिट पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर तैनात थी।


सैन्य सेवा का सफर

जनरल वी.के. सिंह ने 31 मार्च 2010 को सेना प्रमुख का पद संभाला। उनकी छवि एक दृढ़, ईमानदार और स्पष्टवादी अधिकारी के रूप में रही है। हालांकि, उनके साथ उम्र से जुड़े विवाद भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय में मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में भी कार्य किया। 2001 में, जब भारतीय सेना को संसद पर हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम के तहत सीमा पर तैनात किया गया, तब वह ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे।


युद्ध अनुभव और विशेषज्ञता

जनरल वी.के. सिंह ने बांग्लादेश युद्ध को नजदीक से देखा है और सेना अध्यक्ष बनने से पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दी है। उन्हें काउंटर इमरजेंसी ऑपरेशनों और ऊंचाई पर दुश्मनों को पराजित करने की कला में महारत हासिल है।


सम्मान और उपलब्धियाँ

वी.के. सिंह को पीवीएसएम, वाईएसएम, एवीएसएम और एडीसी जैसे कई सम्मान प्राप्त हैं। वह पहले ट्रेंड कमांडो हैं जिन्हें देश का आर्मी चीफ बनने का गौरव मिला। इसके अलावा, वह सुप्रीम कोर्ट में सरकार को ले जाने वाले पहले जनरल भी हैं।


सेना से रिटायरमेंट और सामाजिक योगदान

वी.के. सिंह 31 मई 2012 को सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए। उनका कार्यकाल 26 महीनों तक चला। रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन किया।