जंगलों की आग से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीमों की तैनाती की सिफारिश
जंगलों की आग से निपटने के लिए एनडीआरएफ की तैनाती
नई दिल्ली, 7 अगस्त: एक संसदीय समिति ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में जंगलों की आग से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात करने के लिए लंबित प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने की सिफारिश की है। राज्यसभा में शुक्रवार को पेश की गई रिपोर्ट में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति ने बताया कि यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय के पास जनवरी 2025 से लंबित है। वर्तमान में, एनडीआरएफ के पास असम, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड के लिए तीन वन अग्नि प्रतिक्रिया टीमें हैं, जिनमें कुल 150 कर्मी शामिल हैं।
इस प्रस्ताव में उत्तराखंड में एक अतिरिक्त टीम और हिमाचल प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग टीमों की तैनाती का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2022 में एनडीआरएफ को जंगलों की आग से निपटने की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति ने कहा, “इस संदर्भ में, एनडीआरएफ की पहली, 10वीं और 15वीं बटालियन से 50-50 कर्मियों वाली एक-एक टीम ने सेंट्रल एकेडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विस में वन अग्नि रोकथाम के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।”
हालांकि, उत्तराखंड में 2024 के जंगलों की आग के मौसम में, राज्य की एकमात्र एनडीआरएफ टीम बड़े पैमाने पर आग की घटनाओं से निपटने में कठिनाई महसूस कर रही थी। समिति के अनुसार, इस स्थिति के मद्देनजर यह प्रस्ताव आया कि एनडीआरएफ को संवेदनशील क्षेत्रों में तैयारियों को मजबूत करने के लिए तीन और टीमों की तैनाती करनी चाहिए। समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 2019-20 से 2023-24 के बीच भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जंगल की आग की घटनाओं में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। 2019-20 में आग की कुल घटनाएं 3,566 थीं, जो 2020-21 में बढ़कर 30,672 हो गईं।
इसके बाद, इनकी संख्या में कमी आई और 2021-22 में 25,995 तथा 2022-23 में 8,682 घटनाएं दर्ज की गईं। लेकिन 2023-24 में फिर से इनकी संख्या बढ़कर 37,152 आग की घटनाओं के साथ उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। समिति ने यह भी सिफारिश की कि सरकार को भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग की आवृत्ति, तीव्रता और मौसमी स्थिति के बीच संबंध स्थापित करने के लिए शोध अध्ययन शुरू करना चाहिए।