छत्तीसगढ़ में शिक्षिका की बर्बरता: 13 वर्षीय छात्र को गंभीर चोटें
राजनांदगांव में शिक्षिका की बर्बरता
राजनांदगांव समाचार: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शिक्षिका की छोटी सी बात पर एक 13 वर्षीय छात्र की जिंदगी बदल गई। डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल में कक्षा 7 के छात्र सार्थक सहारे को केवल इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उसे बैग से किताब निकालने में कुछ सेकंड लग गए। इस पिटाई का परिणाम यह हुआ कि छात्र के दोनों कानों की सुनने की क्षमता 70 से 80 प्रतिशत तक प्रभावित हो गई है.
यह घटना 2 जुलाई 2025 को हुई। सोशल साइंस की शिक्षिका प्रियंका सिंह (45) कक्षा में आईं और सार्थक को किताब निकालने का निर्देश दिया। जब छात्र को किताब खोजने में थोड़ी देर हुई, तो उसने विनम्रता से दोबारा पूछा, 'मैम, आपने क्या कहा, मैं सुन नहीं पाया।' यह सुनते ही शिक्षिका का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने सार्थक के कान पर चार जोरदार थप्पड़ जड़ दिए.
पिटाई के बाद जब सार्थक घर पहुंचा, तो उसने अपनी मां संतोषी सहारे को बताया कि उसे सुनाई नहीं दे रहा है। घबराए परिजन उसे पहले डोंगरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां से उसे राजनांदगांव और फिर रायपुर रेफर किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि थप्पड़ों के कारण कान के पर्दे और अंदरूनी नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। डॉक्टरों के अनुसार, इस चोट के लिए लंबे और महंगे इलाज की आवश्यकता होगी.
स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
पीड़ित छात्र के पिता सुधाकर सहारे का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पिछले 9 महीनों से वे न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन स्कूल ने न तो शिक्षिका के खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही बच्चे के इलाज में कोई मदद की। एक अन्य छात्रा ने गवाही दी कि आरोपी शिक्षिका पहले भी कई बच्चों के साथ हिंसक व्यवहार कर चुकी हैं.
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामला बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की। डोंगरगढ़ एसडीओपी केसरी नंदन नायक के निर्देश पर आरोपी शिक्षिका प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच कर रही है.
न्याय की गुहार
सार्थक की मां का कहना है कि यह कोई साधारण सजा नहीं है, बल्कि उनके बच्चे के भविष्य पर हमला है। परिवार की मांग है कि आरोपी शिक्षिका को तुरंत निलंबित किया जाए और स्कूल प्रबंधन छात्र के इलाज का पूरा खर्च उठाए.