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छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित गांवों के लिए बिजली सहायता की मांग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों में ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है। उन्होंने इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये बताई और कहा कि बिजली की उपलब्धता से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। जानें इस प्रस्ताव के बारे में और क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने।
 

मुख्यमंत्री का केंद्र से वित्तीय सहायता का अनुरोध

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों में ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता मांगी है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात की और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत इस सहायता का अनुरोध किया।


बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन गांवों में नक्सल हिंसा के कारण विकास नहीं हो पाया, वहां बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र से तीन वित्तीय वर्षों में सहायता की मांग की गई है।


वित्तीय वर्ष के अनुसार सहायता की योजना

केंद्र से 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये की सहायता की अपेक्षा की गई है, जबकि शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति दी जाए, ताकि बस्तर के दूरदराज गांव भी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।


आदिवासी परिवारों के जीवन में बदलाव

उन्होंने कहा कि बिजली की उपलब्धता से आदिवासी परिवारों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही स्वीकृति की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।