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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से विकास परियोजनाओं पर चर्चा की

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने 10,500 करोड़ रुपये की गैस-आधारित यूरिया परियोजना और 461 गांवों को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए सहायता मांगी। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए रायपुर या बस्तर में आयुर्वेद संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया को तेज करने का अनुरोध किया। जानें इस बैठक में और क्या चर्चा हुई।
 

मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने 10,500 करोड़ रुपये की गैस-आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र मंजूरी देने और 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ने यह भी अनुरोध किया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर या बस्तर में ‘अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान’ (एआईआईए) की स्थापना की प्रक्रिया को तेज किया जाए। छत्तीसगढ़ सरकार के एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधानमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा की।


प्रधानमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।’’ राज्य सरकार के बयान के अनुसार, बैठक के दौरान साय ने बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की और कई प्रमुख विकास पहलों के लिए केंद्र से सहयोग की अपील की। साय ने तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री से सहायता मांगी, जिनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस-आधारित यूरिया परियोजना की शीघ्र मंजूरी शामिल है।


उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि पहले ही आवंटित की जा चुकी है और राज्य स्तर पर सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से किसानों को खाद की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। दूसरी परियोजना 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने से संबंधित है, जिसके लिए केंद्र से विशेष सहायता की आवश्यकता है।


सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित ये गांव अब तक पारंपरिक बिजली नेटवर्क से दूर रहे हैं और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड बिजली प्रणालियों पर निर्भर हैं। साय ने कहा कि ग्रिड कनेक्टिविटी से विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे निवासियों के जीवन स्तर में सुधार होगा और इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। तीसरी परियोजना के तहत, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर या बस्तर में ‘अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान’ की स्थापना की प्रक्रिया को तेज करना है।