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चाइनीज़ मांझा पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चाइनीज़ मांझा की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने बताया कि वह एक नया कानून बनाने की प्रक्रिया में है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में गृह और पर्यावरण विभागों के सचिवों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इस बीच, पतंग संघ ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हस्तक्षेप याचिका दायर की है। जानें इस मामले में और क्या हो रहा है।
 

चाइनीज़ मांझा से होने वाली घटनाएं

चाइनीज़ मांझा के कारण आए दिन कई घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें से कई में लोगों की जान भी जा चुकी है। इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। लखनऊ बेंच ने चाइनीज़ मांझा की बिक्री, खरीद और उपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि इसे बाजार में आने से रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।


सरकार की कार्रवाई

सोमवार को सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वह चाइनीज़ मांझा पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक नया कानून बनाने की प्रक्रिया में है और इसके लिए पहले से ही 6 सदस्यों की एक समिति का गठन किया जा चुका है।


अगली सुनवाई में सचिवों की उपस्थिति

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने गृह और पर्यावरण विभागों के सचिवों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई (13 जुलाई) पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहें। यह आदेश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।


केंद्र सरकार का बयान

सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि लेड-कोटेड और नायलॉन मांझे के उपयोग पर पहले ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा प्रतिबंध लगाया जा चुका है।


पतंग संघ का हस्तक्षेप

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिबंध का प्रभावी अनुपालन हो। इस बीच, शहर के पतंग संघ ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस और अन्य अधिकारी चाइनीज़ मांझा के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर उनके सदस्यों को परेशान कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि संघ के सदस्यों को भी प्रतिबंधित मांझे के उपयोग पर रोक लगाने में सहयोग करना चाहिए।