×

चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, अमृतपाल सिंह की रिहाई की मांग

चंडीगढ़ में ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ के समर्थकों ने अमृतपाल सिंह और अन्य सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जानें इस घटनाक्रम के बारे में और क्या हुआ।
 

चंडीगढ़ में प्रदर्शन का घटनाक्रम

चंडीगढ़, 29 जुलाई: खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह और अन्य सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।


चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने का प्रयास किया, जिसके जवाब में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का सहारा लिया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी जबरन मान के आवास की ओर बढ़ने लगे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के पास भारी पुलिस बल और दंगा-रोधी वाहन तैनात किए।


चंडीगढ़ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कंवरदीप कौर ने बताया कि झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की चोटें गंभीर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले, ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ ने अमृतपाल और अन्य बंदी सिखों की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने का ऐलान किया था।


बंदी सिंह वे सिख कैदी हैं, जिन्हें 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौरान आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के मामलों में दोषी ठहराया गया था। बुधवार को अमृतपाल और बंदी सिंहों के पोस्टर लिए हुए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब से चंडीगढ़ की ओर मार्च किया। उनके साथ तलवारें और अन्य पारंपरिक हथियार लिए निहंग भी शामिल थे।


पुलिस के अनुसार, अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह और पार्टी के प्रमुख नेता मनप्रीत सिंह अयाली भी प्रदर्शनकारियों में शामिल थे। मार्च के दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। प्रदर्शनकारियों को केंद्र-शासित प्रदेश की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बुड़ैल जेल के पास मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर अवरोधक लगाए गए थे।


एक प्रदर्शनकारी पानी की बौछार करने वाले वाहन पर चढ़ गया और उसने वाहन की दिशा भीड़ से दूसरी ओर मोड़ दी। इसके बाद, अन्य प्रदर्शनकारी भी वाहन पर चढ़ गए और अवरोधक तोड़कर चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे।


एसएसपी कौर ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों को गोशाला चौक पर रोका गया और चेतावनी दी गई कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-163 लागू होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ सकते हैं। हालांकि, वे हिंसक हो गए और अवरोधक तोड़ दिए। उनमें से कुछ के पास तलवारें और अन्य खतरनाक हथियार थे।’’ कौर ने कहा कि पुलिस ने संयम बरता।


उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़े तो हमने उन्हें कई जगहों पर रोका और उनके नेताओं से अपने समर्थकों को रोकने की अपील की।’’ कौर के अनुसार, संगठन के नेताओं के अनुरोध के बावजूद कुछ समर्थक आगे बढ़ते रहे, जिससे शहर में यातायात जाम लग गया। चंडीगढ़ के पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार और कुछ पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें रोकने में असफल रहे। प्रदर्शनकारी पंजाब के मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) को ज्ञापन सौंपने के बाद ही वापस लौटे।


कुछ प्रदर्शनकारी फिर भी आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जिन्हें हिरासत में लिया गया। वारिस पंजाब दे समूह खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य अमृतपाल और बंदी सिखों की रिहाई की मांग कर रहा था। अमृतपाल 2023 में अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले से जुड़े मामले में असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।


हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसकी हिरासत 22 अप्रैल को समाप्त हो गई थी।