गोल्ड किंग राजेश मेहता पर SEBI का बड़ा आरोप, शेयरों में गिरावट
राजेश मेहता की मुश्किलें बढ़ीं
देश के प्रमुख गोल्ड कारोबारी और 'गोल्ड किंग' के नाम से मशहूर राजेश मेहता वर्तमान में गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट्स और उनके प्रमोटर पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कड़े प्रतिबंध लगाए। SEBI के इस निर्णय का तात्कालिक प्रभाव कंपनी के शेयरों पर भी पड़ा, जिससे 4 जून को बाजार खुलते ही राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.92 रुपये पर पहुंच गया.
आरोपों का खंडन
राजेश मेहता ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह केवल एक अंतरिम आदेश है और आरोप गलत हैं। उनका कहना है कि कंपनी इस आदेश का गहन अध्ययन कर रही है और जल्द ही अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करेगी। इस घटनाक्रम ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिरकार, वह व्यक्ति जिसने एक छोटे से गैराज से शुरुआत कर एक विशाल गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी खड़ी की, आज इस विवाद में कैसे फंस गया?
विवाद का सार
राजेश मेहता, जो कभी देश के 'गोल्ड किंग' कहलाते थे, अब गंभीर संकट में हैं। उन पर वित्तीय आंकड़ों में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। SEBI ने उन्हें और उनकी कंपनी को शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है। SEBI का आरोप है कि कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। यह राशि कंपनी द्वारा बताए गए कुल मूल्य का लगभग 99.80 प्रतिशत है। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने कंपनी पर सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है.
गैराज से शुरू हुआ सफर
राजेश मेहता की सफलता की कहानी किसी फिल्म की तरह है। उन्होंने 1989 में अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ छोटे स्तर पर कारोबार शुरू किया। शुरुआत में, वे चेन्नई से गोल्ड ज्वेलरी खरीदकर गुजरात के राजकोट में बेचते थे। धीरे-धीरे, उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया और कई बड़े शहरों में पहुंच गए। उसी वर्ष, उन्होंने बेंगलुरु में एक छोटे से गैराज से सोने के गहनों का निर्माण शुरू किया। उनकी मेहनत और व्यावसायिक समझ ने उन्हें तेजी से सफलता दिलाई, और उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहुंच गए।
दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनर
राजेश मेहता की कंपनी भारत से सोने के उत्पादों की सबसे बड़ी निर्यातक कंपनियों में से एक बन गई। 2015 में, उन्होंने स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी Valcambi SA का अधिग्रहण किया, जिससे वैश्विक उद्योग का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ। इसके बाद, उनका कारोबार भारत, स्विट्जरलैंड और दुबई से संचालित होने लगा। उनकी कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में गिना जाता है, जिसकी आधुनिक रिफाइनिंग यूनिट सालाना 2,400 टन सोने के उत्पाद तैयार करने की क्षमता रखती है।
फोर्ब्स की लिस्ट में स्थान
राजेश मेहता कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन हैं और वित्त और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी खुद संभालते हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2019 में फोर्ब्स ने उनकी संपत्ति 1.57 अरब डॉलर आंकी थी, जो वर्तमान में लगभग 14,915 करोड़ रुपये के बराबर है.