गुलाम नबी आजाद का 77वां जन्मदिन: राजनीति में उनके सफर की कहानी
गुलाम नबी आजाद, भारतीय राजनीति के एक प्रमुख चेहरे, आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में 50 साल बिताए और बाद में डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव आजाद पार्टी की स्थापना की। उनके जीवन की यात्रा में शिक्षा, मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल, और कांग्रेस से इस्तीफे जैसे महत्वपूर्ण क्षण शामिल हैं। इस लेख में उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जो पाठकों को उनकी राजनीतिक यात्रा के बारे में और जानने के लिए प्रेरित करेगा।
Mar 7, 2026, 11:34 IST
गुलाम नबी आजाद का परिचय
भारतीय राजनीति में गुलाम नबी आजाद का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आज, 07 मार्च को, वह अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पड़ाव आए हैं। कांग्रेस पार्टी के साथ 50 वर्षों तक जुड़े रहने के बाद, उन्होंने पार्टी छोड़कर डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव आजाद पार्टी की स्थापना की। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...
जन्म और शिक्षा
गुलाम नबी आजाद का जन्म 07 मार्च 1949 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद जीजीएम साइंस कॉलेज, जम्मू से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने कश्मीर विश्वविद्यालय से प्राणीशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की।
कांग्रेस पार्टी में प्रमुख भूमिका
गुलाम नबी आजाद को कई दशकों तक कांग्रेस पार्टी का एक प्रमुख चेहरा माना गया। इसका मुख्य कारण उनका गांधी परिवार के साथ करीबी संबंध था। हालांकि, समय के साथ उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और जम्मू-कश्मीर में अपनी नई पार्टी, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी, की स्थापना की।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री
गुलाम नबी आजाद ने 1973 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। कांग्रेस में शामिल होने के बाद, उन्होंने धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ी और 2005 में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। अपने 50 साल के राजनीतिक करियर में, वह दो बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे। इसके अलावा, वह कांग्रेस के उच्च पदों पर भी रहे और 1982 से कांग्रेस की हर सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। 2006 और 2008 में, वह जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य भी रहे।
कांग्रेस से इस्तीफा
लगभग चार दशकों तक कांग्रेस में रहने के बाद, गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। कांग्रेस में उनकी भूमिका विश्वासपात्र, संकट मोचक और पावर प्लेयर के रूप में रही। 2018 में, कर्नाटक चुनाव के बाद जेडीएस के साथ गठबंधन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।