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गाजियाबाद के डीएम ने बुजुर्ग महिला की मदद कर दिखाई इंसानियत की मिसाल

गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मदद कर मानवता की एक अद्भुत मिसाल पेश की। महिला ने अपनी आर्थिक समस्याओं के बारे में डीएम को बताया, जिसके बाद उन्होंने न केवल प्रशासनिक सहायता प्रदान की, बल्कि अपनी जेब से 22,000 रुपये भी दिए। इस घटना ने कलेक्ट्रेट में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। जानें इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में।
 

गाजियाबाद में जनसुनवाई के दौरान बुजुर्ग महिला की दास्तान


गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में रोजाना सैकड़ों लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं, लेकिन गुरुवार को एक विशेष घटना घटी। 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला, जो अपनी परेशानियों से बेहद दुखी थीं, जब गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के समक्ष पहुंचीं, तो उन्होंने न केवल प्रशासनिक सहायता प्रदान की, बल्कि मानवता की एक अद्भुत मिसाल भी पेश की।


डीएम ने बुजुर्ग महिला की समस्याओं को सुना

वसुंधरा (सेक्टर-3) की निवासी सत्या शर्मा आर्थिक संकट का सामना कर रही थीं। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि उनकी विधवा पेंशन लंबे समय से रुकी हुई है और आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन पा रहा है, जिससे उन्हें इलाज और जीवनयापन में कठिनाई हो रही है।


महिला की स्थिति देखकर डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ का दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए और समस्या का समाधान करने के लिए कार्रवाई शुरू की।


डीएम ने अपनी जेब से दिए 22,000 रुपये

डीएम के आदेश पर कलेक्ट्रेट में महिला के आयुष्मान कार्ड की प्रक्रिया तुरंत शुरू की गई। इसके साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि जुलाई से उनकी रुकी हुई विधवा पेंशन फिर से चालू हो जाएगी।


महिला को तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए, डीएम ने अपनी परीक्षा ड्यूटी से प्राप्त 22,000 रुपये अपनी जेब से निकालकर महिला को सौंप दिए।


कलेक्ट्रेट में उपस्थित लोगों की आंखों में आंसू

इस अचानक मिली सहायता से बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए। जनसुनवाई में उपस्थित अन्य लोगों और अधिकारियों ने जिलाधिकारी की इस संवेदनशीलता की सराहना की। लोगों का कहना था कि कड़े प्रशासनिक अधिकारियों के बीच ऐसा मानवीय चेहरा देखना दुर्लभ है।


डीएम का संदेश

गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्याय और समय पर सहायता प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जिले के सभी पात्र व्यक्तियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
– रविन्द्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी, गाजियाबाद


इस भावुक क्षण के दौरान कलेक्ट्रेट में मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। डीएम के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि नियमों का पालन करते हुए भी अधिकारियों के दिल में जनता के प्रति संवेदनशीलता होना आवश्यक है।