गंगा नदी में प्रदूषण पर एनजीटी का बड़ा आदेश, बीएसपीसीबी को पर्यावरणीय मुआवजा लगाने का निर्देश
एनजीटी का आदेश: गंगा में अशोधित अपशिष्ट प्रवाह पर कार्रवाई
नई दिल्ली, 5 अगस्त: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) को निर्देश दिया है कि वह शहरी स्थानीय निकायों पर गंगा नदी में अशोधित अपशिष्ट प्रवाहित करने के लिए पर्यावरणीय मुआवजा लगाए। यह आदेश उस मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें हरित अधिकरण ने ‘नदी प्रदूषण पर बिहार सरकार की रिपोर्ट: गंगा का पानी नहाने के लिए भी असुरक्षित’ शीर्षक वाली एक समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 3 अगस्त को दिए गए आदेश में कहा, ‘‘अधिकरण बिहार के 27 जिलों में गंगा, सोन, कोसी और बागमती जैसी नदियों में प्रदूषण और ‘फिकल कोलीफ़ॉर्म’ जीवाणु की मौजूदगी की जांच कर रहा है।’’
पीठ ने यह भी कहा कि जिस समाचार रिपोर्ट के आधार पर याचिका दायर की गई थी, उससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार में बहने वाली सभी प्रमुख नदियां नहाने के लिए असुरक्षित हैं। राज्य के पर्यावरण विभाग ने एक हलफनामा प्रस्तुत किया है, जिसमें बताया गया है कि बिहार में वर्तमान में 43 अपशिष्ट शोधन संयंत्र (एसटीपी) हैं।
इनमें से 15 संयंत्र चालू हैं, पांच का परीक्षण चल रहा है, नौ पर कार्य जारी है, चार निविदा के चरण में हैं और 10 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में हैं। एनजीटी ने विभाग को निर्देश दिया कि वह इन एसटीपी की क्षमता और निर्माणाधीन संयंत्र की प्रगति के बारे में और जानकारी प्रदान करे। इसके साथ ही, बीएसपीसीबी से यह भी पूछा गया कि क्या इन एसटीपी से निकला शोधित जल मानकों को पूरा करता है।
हरित अधिकरण ने यह भी बताया कि हलफनामे के अनुसार, पटना में 15 नालों से प्रतिदिन लगभग 34.9 करोड़ लीटर पानी गंगा में प्रवाहित होता है; बक्सर में सात नालों से 5 करोड़ लीटर, आरा (भोजपुर) में पांच नालों से 4.7 करोड़ लीटर, जमालपुर (मुंगेर) में पांच नालों से 2.5 करोड़ लीटर और बरौनी में दो नालों से 2.3 करोड़ लीटर पानी गंगा में गिरता है। इसके अलावा, डुमरांव (बक्सर) में तीन और बड़हिया (लखीसराय) में छह नाले हैं जिन पर अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ है। एनजीटी ने कहा, ‘‘चूंकि, मल-जल गंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है, इसलिए बीएसपीसीबी को उन शहरी स्थानीय निकायों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए जो नालों के जरिए गंगा में अशोधित अपशिष्ट प्रवाहित करने के लिए जिम्मेदार हैं।’’
इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।