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गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली की शुरुआत में देरी, जानें पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली की शुरुआत में देरी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद, वाहन चालक बिना टोल के यात्रा कर सकते हैं। टोल दरें प्रति किलोमीटर के आधार पर निर्धारित की गई हैं, और यात्रा की गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा है। एक्सप्रेसवे की तकनीकी विशेषताएँ इसे मजबूत बनाती हैं, जिससे यह भारी यातायात का दबाव सहन कर सके। जानें इस एक्सप्रेसवे के बारे में और अधिक जानकारी।
 

गंगा एक्सप्रेसवे का हालिया उद्घाटन

उत्तर प्रदेश में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहन चालक फिलहाल बिना टोल के यात्रा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में इसका उद्घाटन किया गया, जिसके बाद यह यातायात के लिए खुल गया है। हालांकि, टोल प्लाजा पर वसूली अभी शुरू नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लगभग 10 से 15 दिनों में टोल संग्रहण शुरू होगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल दरें पहले ही निर्धारित कर दी हैं। ये दरें प्रति किलोमीटर के आधार पर हैं, और मेरठ से प्रयागराज की यात्रा पर कार चालकों को लगभग 1,515 रुपये का खर्च आएगा.


वाहनवार टोल दरें

टोल दरें इस प्रकार हैं:



  • दोपहिया, तिपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर: 1.28 रुपये

  • कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन: 2.55 रुपये

  • हल्के वाणिज्यिक और हल्के माल वाहन / मिनी बस: 4.05 रुपये

  • बस, ट्रक: 8.20 रुपये

  • भारी निर्माण मशीनरी, अर्थमूविंग वाहन: 12.60 रुपये

  • 7 या अधिक एक्सल वाले भारी वाहन: 16.10 रुपये


एक्सप्रेसवे की स्पीड लिमिट

गंगा एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। यह टोल बंद प्रणाली पर आधारित होगा, जिसका अर्थ है कि वाहन जितनी दूरी तय करेगा, उतना ही टोल लिया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना के साथ बनाया गया है, ताकि यह भीषण गर्मी, भारी बारिश और भारी यातायात का दबाव सह सके.


सड़क की मजबूती और तकनीकी विशेषताएँ

मुख्य कैरिजवे पर मौसम अनुकूल डामर की परत की मोटाई 100 मिलीमीटर है। इसमें कुल 3,67,022 मीट्रिक टन डामर का उपयोग किया गया है। सड़क की मजबूती के लिए कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (CBR) का उच्च मान अपनाया गया है। कुल 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मीट्रिक टन स्टील, 14.83 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 41.88 लाख घन मीटर रेत का उपयोग किया गया है।


भविष्य की रखरखाव लागत में कमी

डिजाइन क्रस्ट तकनीक के उपयोग से भविष्य में रखरखाव की लागत कम होगी। यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक स्ट्रेस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो सड़क की स्थिति की रियलटाइम निगरानी करेगी.


सफर में कमी और व्यापार में वृद्धि

मेरठ से प्रयागराज का सफर पहले 10-12 घंटे का था, अब यह केवल 6 घंटे में पूरा होगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच व्यापार, उद्योग और कनेक्टिविटी को भी नई गति प्रदान करेगा.