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खाड़ी देशों की दौड़: वैश्विक नेताओं की ऊर्जा सुरक्षा की खोज

ईरान युद्ध के चलते, दुनिया के प्रमुख नेता खाड़ी देशों की दौड़ में शामिल हो रहे हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और भारत के मंत्री हरदीप पुरी ने हाल ही में इस क्षेत्र का दौरा किया। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करना है। जानें, खाड़ी देशों का महत्व और क्यों ये दौरे वैश्विक ऊर्जा संकट के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
 

खाड़ी देशों की दौड़ में वैश्विक नेता

हाल के दो हफ्तों में, ईरान के युद्ध के बीच, दुनिया के तीन प्रमुख नेता खाड़ी देशों की यात्रा पर निकले हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल ही में इस क्षेत्र का दौरा किया। अब भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं। आइए जानते हैं इन यात्राओं के पीछे की वजह क्या है?


पहले मेलोनी, फिर स्टार्मर, अब भारत के मंत्री…दुनिया के नेता खाड़ी देशों की दौड़ क्यों लगा रहे हैं?


मेलोनी का इमरजेंसी दौरा

युद्ध के दौरान किसी भी यूरोपीय संघ के नेता की खाड़ी की यह पहली यात्रा थी। मेलोनी ने सऊदी अरब, कतर और यूएई का दौरा किया, जो 4 से 5 अप्रैल के बीच हुआ। इटली की गैस खपत का लगभग 10% हिस्सा कतर से आने वाली LNG पर निर्भर है, और मिडिल ईस्ट से तेल आयात का हिस्सा लगभग 12% है। होर्मुज बंद होने के कारण, अप्रैल से जून के बीच इटली जाने वाले 10 बड़े गैस कार्गो फंस गए। मेलोनी ने जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की और कहा कि इटली इस कठिन समय में खाड़ी सहयोगियों के साथ खड़ा है।



स्टार्मर का दौरा

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 8 से 10 अप्रैल तक सऊदी अरब, यूएई और कतर का दौरा किया। उन्होंने जेद्दा में क्राउन प्रिंस MBS से मुलाकात की और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद, वे यूएई पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की। स्टार्मर ने सऊदी अरब को एक महत्वपूर्ण सहयोगी बताया और 'स्काई सैबर' एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती के माध्यम से सऊदी सुरक्षा के प्रति ब्रिटेन की प्रतिबद्धता को दोहराया।



भारत का दौरा

भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल 2026 तक कतर के दौरे पर हैं। उनका मुख्य उद्देश्य LPG और LNG आपूर्ति में आ रही बाधाओं का समाधान खोजना है। विदेश मंत्री जयशंकर भी यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं। भारत अपनी कुल LNG जरूरतों का लगभग 40% कतर से आयात करता है, और ईरानी हमलों ने कतर की LNG निर्यात क्षमता का लगभग 17% प्रभावित किया है। कतर के 14 LNG प्लांट्स में से 2 और गैस-टू-लिक्विड सुविधाओं में से 1 को भारी नुकसान हुआ है, जिससे हर साल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन ठप हो गया है। इसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं।



खाड़ी का महत्व

खाड़ी क्षेत्र के महत्व के तीन प्रमुख कारण हैं। यहां हर दिन लगभग 3 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन होता है, जो दुनिया के कुल उत्पादन का 29% है। इसके अलावा, खाड़ी देश प्रतिदिन लगभग 70 अरब क्यूबिक फीट गैस का उत्पादन करते हैं। यह क्षेत्र एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच स्थित है, जिससे यह व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनता है।


ईरान युद्ध के दौरान हुए हमलों के कारण कतर को हर साल लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। यही कारण है कि सभी प्रमुख देश खाड़ी देशों की ओर दौड़ रहे हैं, क्योंकि जो खाड़ी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा, वही ऊर्जा संकट से बच सकेगा। सभी देशों के दौरे का एक ही उद्देश्य है: अपने देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना।