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खाड़ी क्षेत्र में युद्धविराम संकट में, यूएई पर मिसाइलों का हमला

खाड़ी क्षेत्र में अस्थायी युद्धविराम एक बार फिर संकट में है, जब यूएई पर मिसाइलों और ड्रोन का हमला हुआ। अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलों को विफल किया है, जबकि राष्ट्रपति ने युद्धविराम की स्थिति को बनाए रखने की बात की है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। क्या यह नाजुक शांति समझौता टूट जाएगा? जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
 

खाड़ी क्षेत्र में अस्थायी युद्धविराम की स्थिति

खाड़ी क्षेत्र में चल रहा अस्थायी युद्धविराम एक बार फिर गंभीर संकट में है। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार की सुबह यह जानकारी दी कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली देश की ओर दागी गई मिसाइलों और ड्रोन का 'सक्रिय रूप से मुकाबला' कर रही है। यह घटना उस समय हुई जब कुछ घंटे पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना और ईरानी बलों के बीच सीधी मुठभेड़ हुई थी।


यूएई में सुरक्षा उपाय


मंत्रालय ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे हवाई हमलों में गिराए गए प्रक्षेपास्त्रों के मलबे या टुकड़ों के पास न जाएं, न ही उनकी तस्वीरें लें या उन्हें छुएं। कुछ घंटे पहले, अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने बृहस्पतिवार रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तीन नौसैनिक जहाजों पर ईरानी हमलों को विफल किया और ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।


अमेरिकी सेना की प्रतिक्रिया

यूएस सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी बलों ने 'बिना किसी उकसावे के ईरानी हमलों' को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि किसी भी पोत को नुकसान नहीं पहुंचा है और वे तनाव बढ़ाना नहीं चाहते, लेकिन 'अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए तैयार हैं।'


राजनीतिक स्थिति

अमेरिका के राष्ट्रपति ने संवाददाताओं से कहा कि हिंसा के बावजूद युद्धविराम बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम काफी हद तक प्रभावी है। पिछले महीने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे।


अंतरराष्ट्रीय बाजार पर प्रभाव

यूएई जैसे व्यापारिक केंद्र पर हमले और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग में सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। यदि यह हिंसा जारी रहती है, तो 8 अप्रैल का नाजुक शांति समझौता पूरी तरह से टूट सकता है।