क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 20 अरब डॉलर का नया फ्रेमवर्क पेश किया
भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने मिलकर क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव का अनावरण किया है, जिसमें 20 अरब डॉलर तक जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और लचीला बनाने के लिए है। इस फ्रेमवर्क में निवेश, नियामक सामंजस्य और पुनर्चक्रण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। जानें इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में और कैसे यह आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
May 26, 2026, 21:47 IST
क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव का अनावरण
भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने मंगलवार को क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क का अनावरण किया। इस पहल का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और लचीला बनाना है। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र से 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक जुटाने का संकल्प लिया गया है। यह घोषणा क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद की गई, जिसमें भागीदार देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास को समर्थन देने पर सहमति जताई। ये खनिज उन्नत प्रौद्योगिकियों और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं। विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पहल के माध्यम से भागीदार देश विविध और निष्पक्ष खनिज बाजारों के विकास में तेजी लाने का प्रयास करेंगे।
फ्रेमवर्क के मुख्य क्षेत्र
यह फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को निर्धारित करता है, जिसमें घरेलू नीतियों का ध्यान रखा गया है। इसमें तीन मुख्य क्षेत्र शामिल हैं: निवेश और परियोजना विकास, नियामक सामंजस्य, और खनिजों का पुनर्चक्रण। क्वाड साझेदार 20 अरब डॉलर तक का समर्थन जुटाने का इरादा रखते हैं, जिसमें खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण शामिल हैं। इसके लिए उन परियोजनाओं की पहचान की जाएगी जो आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद कमियों को दूर करती हैं।
सहयोग और समन्वय
बयान में कहा गया है कि क्वाड साझेदार अपने घरेलू कानूनों के अनुसार खनिजों के विकास के लिए वातावरण में सुधार लाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए वे परमिट और लाइसेंस से संबंधित अच्छी प्रथाओं पर जानकारी साझा करेंगे, जिसमें प्रक्रियाओं को तेज करने के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, भूवैज्ञानिक मानचित्रण और संसाधन मूल्यांकन में सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।