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कोविड-19 शहीद एएनएम सुशीला की प्रतिमा का अनावरण, चिकित्सा कर्मियों का बलिदान याद किया गया

झुंझुनू में एएनएम सुशीला की याद में एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जो कोविड-19 के दौरान उनकी निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करती है। यह प्रतिमा चिकित्सा कर्मियों के बलिदान का प्रतीक बन गई है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना की है, जिससे सुशीला की सेवा और बलिदान को अमर बनाए रखा जा सके।
 

एएनएम सुशीला की स्मृति में प्रतिमा की स्थापना


झुंझुनू (राजस्थान) में कोविड-19 महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए जान गंवाने वाली एएनएम सुशीला की याद में उनके ससुराल रामपुरा गुढ़ा गोड़जी में एक प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा संभवतः देश में किसी कोविड शहीद की पहली प्रतिमा है, जो चिकित्सा कर्मियों के बलिदान को सम्मानित करती है।


एएनएम सुशीला ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित मरीजों का इलाज करते हुए खुद भी वायरस से संक्रमित होकर अपनी जान दी। उनकी स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, चिकित्सा विभाग के अधिकारी और ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


सुशीला ने बिना किसी लापरवाही के संक्रमितों की सेवा की, लेकिन अंततः वे भी वायरस की चपेट में आ गईं। उनकी निस्वार्थ सेवा को याद करते हुए स्थानीय लोगों और चिकित्सा विभाग ने उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया।


चिकित्सा विभाग के लिए यह प्रतिमा गर्व का प्रतीक मानी जा रही है। स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि सुशीला जैसी बहादुर महिलाएं महामारी के समय देश की सेवा में अपनी जान की परवाह नहीं करतीं। यह प्रतिमा न केवल उनकी याद दिलाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्यकर्मियों को प्रेरित भी करेगी।


स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कोविड योद्धाओं के बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता और ऐसी प्रतिमाएं उनके योगदान को अमर बनाए रखेंगी।


रामपुरा गुढ़ा गोड़जी के ग्रामीणों में इस प्रतिमा को लेकर विशेष उत्साह है। परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा कि सुशीला की सेवा और बलिदान पर उन्हें गर्व है।


यह घटना उन हजारों अज्ञात स्वास्थ्यकर्मियों की याद दिलाती है जिन्होंने कोविड-19 से लड़ते हुए अपनी जान गंवाई, लेकिन समाज को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एएनएम सुशीला की प्रतिमा अब न केवल झुंझुनू जिले बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।