कोलकाता में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 16 लोगों को मिली जमानत
कोलकाता अदालत का निर्णय
कोलकाता, 28 जुलाई: एक स्थानीय अदालत ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक से संबंधित मामले में वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार 16 व्यक्तियों को मंगलवार को जमानत प्रदान की। इससे पहले, अदालत ने उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में रखा था। 24 जुलाई को सियालदह स्टेशन से एस्प्लेनेड तक निकाले गए मार्च के दौरान कुछ लोगों ने मीडियाकर्मियों पर हमला किया, जिससे कई पत्रकार घायल हुए थे।
पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि नीट (यूजी) परीक्षा में संभावित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई भी ‘दंडात्मक कार्रवाई’ नहीं की जाएगी। अदालत ने वामपंथी छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार सभी 16 व्यक्तियों को जमानत दी। इनमें से 14 पहले ही गिरफ्तार किए गए थे, जबकि दो अन्य को सोमवार को पुलिस ने पकड़ा था।
सरकार ने स्पष्ट किया, ‘नीट (यूजी) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से संबंधित प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।’ इसके साथ ही, अदालत ने वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में किए गए प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार सभी 16 लोगों को जमानत दी। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने पहले दिन में इन आरोपियों को 30 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। आरोपियों की ओर से वकील शमीम अहमद, राजा सेनगुप्ता, यासीन रहमान, संजय कुमार गुप्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की।
मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने दावा किया कि हिंसा में शामिल कम से कम 70 लोग न तो छात्र थे और न ही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सदस्य। सरकार के अनुसार, इन व्यक्तियों का कथित नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं था।