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कोलकाता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को आवाज का नमूना देने का आदेश दिया

कोलकाता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया है। यह निर्देश चुनाव प्रचार के दौरान उनके कथित डराने-धमकाने वाले बयानों के मामले में दिया गया है। न्यायालय ने बनर्जी की देरी पर नाराजगी जताई और पुलिस को निर्देश दिया कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
 

अभिषेक बनर्जी को न्यायालय का निर्देश

कोलकाता में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से डराने-धमकाने वाले बयानों के मामले में पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने सांसद को 15 जुलाई को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना देने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बनर्जी द्वारा आवाज का नमूना देने में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।


सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि वह इस मामले में कार्यवाही को रद्द करने और सांसद को कठोर कार्रवाई से सुरक्षा देने वाले आदेश को वापस लेने की याचिका पर समय से पहले सुनवाई कर सकते हैं। बनर्जी को यह राहत 31 जुलाई तक दी गई है, जो कि अप्रैल में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में की गई टिप्पणियों के संबंध में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। टीएमसी सांसद ने इस प्राथमिकी को रद्द करने का भी अनुरोध किया है।


उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जब बनर्जी क्षेत्राधिकार वाली अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष पेश हों, तो यह सुनिश्चित किया जाए कि उन पर अंडे न फेंके जाएं और न ही उन्हें किसी अन्य तरीके से परेशान किया जाए। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने आश्वासन दिया कि ऐसी कोई घटना नहीं होगी।


इससे पहले, बनर्जी ने बिधाननगर सब-डिविजनल न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जांच के सिलसिले में पुलिस के अनुरोध पर उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना देने के लिए कहा गया था। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि बनर्जी को जांच में सहयोग करने और नोटिस का पालन करने की शर्त पर ही कठोर कार्रवाई से संरक्षण दिया गया है। आदेश का पालन न करने पर न्यायाधीश ने याचिका खारिज करने और भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी थी।


सांसद के वकील ने अदालत को बताया कि बनर्जी स्वीकार करते हैं कि जिस भाषण पर सवाल उठाए गए हैं, उसमें उनकी ही आवाज थी, लेकिन उन्हें निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने का संवैधानिक अधिकार है। वकील ने कहा कि सांसद शनिवार को अपनी आवाज का नमूना देने के लिए तैयार हैं और उन्होंने सुरक्षा की मांग की। अंततः, कोर्ट ने बनर्जी की समीक्षा याचिका को उनके वकील के अनुरोध पर वापस लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया और उन्हें 15 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ने इस बात पर भी दुख जताया कि 21 मई का आदेश होने के बाद समीक्षा याचिका को दूसरी पीठ के समक्ष ले जाया गया, जिससे याचिकाकर्ता का आचरण स्पष्ट होता है।