कॉकरोच जनता पार्टी की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात, मांगे रखीं
कॉकरोच जनता पार्टी की मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग की। जेपी नड्डा ने ट्वीट कर बताया कि आज सुबह प्रदर्शनकारियों ने सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव रखा, जो सुबह 11:50 बजे से शुरू हुई। बैठक का माहौल सकारात्मक था, और प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रारंभिक चर्चा विस्तार से हुई। शाम को करीब 4 बजे, उन्होंने एक लिखित ज्ञापन सौंपा। नड्डा ने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपना धरना समाप्त करें और प्रशासन को स्थिति सामान्य करने में मदद करें।
सौरभ दास का बयान
सौरभ दास ने एक्स पर लिखा कि वह और आशुतोष रांका दोपहर 12 बजे से जेपी नड्डा के निवास पर हैं। उन्होंने अपनी मांगें रखी हैं, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा या उन्हें पद से हटाने की मांग शामिल है। मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर उचित स्तर पर चर्चा करेंगे, लेकिन अभी तक कोई ठोस वादा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी नहीं बैठेंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर और उसके आसपास कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन पुलिस की स्थिति पर कोई जानकारी नहीं मिली है।
CJP की मांगें और पुलिस का खंडन
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी की तीन प्रमुख मांगें थीं: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर जाने की अनुमति, और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा। वहीं, दिल्ली पुलिस ने उन खबरों का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने इसे पूरी तरह से गलत बताया।
पुलिस की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ये भ्रामक रिपोर्ट विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर फैल रही हैं, जिसमें दावा किया गया है कि अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया है। औपचारिक रूप से स्पष्ट किया गया है कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। इससे पहले, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी इसी तरह का दावा किया था। उन्होंने सांसदों से अनुरोध किया कि वे छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरें, यह कहते हुए कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता से कार्रवाई कर रही है।