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कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा विदेशी साजिशों को नाकाम करता है

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में एक प्रेस वार्ता में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विदेशी ताकतों की साजिशों को विफल करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रधान का यह कदम भारत में हिंसा फैलाने की कोशिशों को नाकाम कर देता है। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा अध्यक्ष की सलाह का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को समाप्त कर दिया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
 

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और उसके प्रभाव

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एक महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में छात्र आंदोलन के पहले दिन भाजपा अध्यक्ष को इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी को लगता है कि इस्तीफा आवश्यक है, तो वह इसके लिए तैयार हैं।


विदेशी ताकतों की साजिश का पर्दाफाश

विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उन विदेशी ताकतों के मंसूबों को विफल कर देता है, जो भारत में हिंसा फैलाकर माहौल को खराब करना चाहती थीं। उन्होंने बताया कि कुछ शक्तियां भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात उत्पन्न करना चाहती थीं, लेकिन प्रधान के इस कदम ने उनकी योजना को नाकाम कर दिया। इस निर्णय के लिए विजयवर्गीय ने प्रधान को बधाई दी।


भाजपा अध्यक्ष की सलाह

विजयवर्गीय के अनुसार, जब प्रधान ने इस्तीफे की बात की, तब भाजपा अध्यक्ष ने उन्हें सलाह दी कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसलिए, उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए और न ही इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए। बाद में, जब स्थिति बदली और पार्टी ने निर्णय लिया, तो प्रधान ने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया।


कांग्रेस पर कटाक्ष

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के जश्न मनाने पर विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पड़ोसी के घर में बच्चे के जन्म पर ढोल पीट रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस छात्र आंदोलन में कांग्रेस का कोई योगदान नहीं था, वे केवल पीछे से राजनीति कर रही थीं। पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद विपक्ष पूरी तरह से निराश हो चुका था और अब उन्हें सीजेपी के आंदोलन में उम्मीद की एक नई किरण नजर आई थी।


36 दिनों का आंदोलन समाप्त

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मोदी सरकार द्वारा छात्रों की मांगों को मानने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहा यह प्रदर्शन समाप्त हो गया है और छात्र अपने घर लौट गए हैं। यह आंदोलन परीक्षाओं में धांधली और नीट पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ था।