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केरल विधानसभा चुनाव 2026: बीजेपी की रणनीति और बढ़ता जनाधार

केरल में 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी का ध्यान 30 सीटों पर केंद्रित है। पिछले एक दशक में बीजेपी का जनाधार बढ़ा है, और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में उनके हालिया प्रदर्शन ने उनकी स्थिति को मजबूत किया है। एनडीए ने 'विकसित केरल' के वादे के साथ चुनावी मैदान में उतरने की योजना बनाई है। जानें इस चुनाव में बीजेपी की रणनीति और भविष्य की संभावनाएं।
 

केरल में मतदान की तैयारी

केरल राज्य में मतदान की तिथि तेजी से नजदीक आ रही है। 09 अप्रैल 2026 को राज्य की 140 सीटों पर एक चरण में मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 04 मई को की जाएगी। इस बार भारतीय जनता पार्टी की एंट्री के कारण चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है, जबकि पहले केरल में ज्यादातर दोतरफा चुनाव होते थे। एनडीए ने चुनावी मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।


बीजेपी का चुनावी अभियान

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में अपने चुनाव प्रचार को तेज कर दिया है, जिसकी अगुवाई स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। पार्टी का ध्यान प्रदेश की 30 सीटों पर केंद्रित है। उनका मानना है कि यदि वे इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो इससे प्रदेश में गठबंधन को मजबूती मिलेगी।


भाजपा का बढ़ता प्रभाव

पिछले एक दशक में केरल में भारतीय जनता पार्टी का जनाधार काफी बढ़ा है। हाल ही में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और वहां अपनी स्थिति मजबूत की। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से सुरेश गोपी ने जीत हासिल की थी।


2026 का चुनावी एजेंडा

2026 के विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए ने 140 सीटों पर अपनी पूरी ताकत से उतरने की योजना बनाई है। पार्टी ने 'विकसित केरल' के वादे के साथ वामपंथ के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने का खाका तैयार किया है। सुशासन, विकास, और मोदी की गारंटी के आधार पर एनडीए ने केरल की राजनीति में 'किंगमेकर' या उससे अधिक की भूमिका निभाने का लक्ष्य रखा है।