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केरल में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण पर विवाद: विपक्ष का विरोध

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को गाने के आदेश पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आरएसएस के प्रभाव में आ रही है और यह आदेश धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है। विजयन ने संविधान सभा के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि केवल प्रारंभिक छंद ही गाए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर कांग्रेस और माकपा ने भी सरकार की आलोचना की है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

विपक्ष का मुख्य सचिव के आदेश पर सवाल

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को मुख्य सचिव द्वारा जारी उस आदेश को वापस लेने की मांग की, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाने का निर्देश दिया गया है। विजयन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव में आ रही है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ है।


संविधान सभा का निर्णय

विजयन ने यह भी बताया कि संविधान सभा ने तय किया था कि इस गीत के केवल प्रारंभिक छंद ही गाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे देश में ‘वंदे मातरम’ के बारे में एक आम सहमति है कि यह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप नहीं है।”


सरकार की नीति में बदलाव

उन्होंने आगे कहा कि जब देश ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का निर्णय लिया, तो संविधान सभा ने यह तय किया कि ऐसे गीतों को नहीं गाया जाना चाहिए जो धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हों। विजयन ने कहा, “शुरुआती पंक्तियों को गाने में कोई समस्या नहीं है। संविधान सभा ने स्पष्ट किया था कि केवल प्रारंभिक पंक्तियाँ ही गाई जानी चाहिए।”


आरएसएस का एजेंडा

विजयन ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद नीति में बदलाव आया है। उन्होंने मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “यह बदलाव तब हुआ जब नई (यूडीएफ) सरकार सत्ता में आई। पहले दिन, मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया गया।”


विपक्ष की आलोचना

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पी राजीव ने मुख्य सचिव के आदेश की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस निर्णय को लेने से पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के निर्देशों का इंतजार किया। राजीव ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को केंद्र के निर्देशों का पालन करना है, तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों की आवश्यकता क्या है?


कांग्रेस का रुख

राजीव ने कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर यह रुख है कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण नहीं गाया जाना चाहिए। उन्होंने एआईसीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल से स्पष्टता मांगी कि क्या इस रुख में कोई बदलाव आया है।


मुख्य सचिव का पत्र

केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा ने छह अगस्त को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के संदर्भ में एक पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत 2022 में शुरू किए गए इस अभियान को 2026 में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के जश्न के साथ मनाया जाएगा। पत्र में यह भी कहा गया कि इस दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों में पूरे ‘वंदे मातरम’ को सामूहिक रूप से गाने का निर्देश दिया गया है।