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केरल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री ने वित्तीय सहायता की घोषणा की

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। उन्होंने एक नई आपदा प्रबंधन प्रणाली की योजना भी बनाई है, जो मौसम की सटीक जानकारी देने में मदद करेगी। इस प्रणाली का विकास विशेषज्ञ एजेंसियों और एआई के सहयोग से किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़ के कारणों और नदियों से गाद निकालने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण योजना के बारे में और अधिक जानकारी।
 

मुख्यमंत्री का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

पत्तनमथिट्ठा (केरल) में, मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने मंगलवार को बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने हाल की भारी बारिश के कारण जलमग्न हुए घरों के लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार मौसम की अचानक बदलाव की सटीक जानकारी देने और आपदाओं से निपटने के लिए एक नई आपदा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने की योजना बना रही है।


नई आपदा प्रबंधन प्रणाली का विकास

सतीशन ने कहा कि यह नई प्रणाली विशेषज्ञ एजेंसियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सहयोग से विकसित की जाएगी, जो पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि राज्य में मानव चालित और एआई-सक्षम वर्षामापी उपकरण लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन पर काम कर रही प्रतिष्ठित संस्थाओं की विशेषज्ञता का भी उपयोग किया जाएगा।


भारी बारिश और उसके प्रभाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावी मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को पहले पत्तनमथिट्ठा जिले में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बादल फटने या अत्यधिक बारिश की घटनाएं बिना पूर्व चेतावनी के होती हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का समय नहीं मिलता।


भूस्खलन और बाढ़ के कारण

सतीशन ने बताया कि आमतौर पर 200 मिमी से अधिक बारिश को अत्यधिक भारी माना जाता है, लेकिन इस बार कुछ स्थानों पर 340 मिमी तक बारिश हुई है। उन्होंने भूस्खलन और जंगलों में मिट्टी के धंसने को बाढ़ का एक मुख्य कारण बताया। इसके अलावा, उन्होंने पुष्टि की कि भारी बारिश के बाद से सात लोग लापता हैं।


नदियों से गाद निकालने की योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित आपदा प्रबंधन प्रणाली, जो देश में सबसे प्रभावी होगी, भूस्खलन सहित सभी पहलुओं की जांच के बाद शुरू की जाएगी। उन्होंने नदियों के तल में गाद के जमा होने को बाढ़ का मुख्य कारण बताया और कहा कि 2019 के बाद से नदियों से गाद निकालने का कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल की बाढ़ से नदियों में और मलबा जमा होगा, जिससे जल-धारण क्षमता कम हो जाएगी।


सरकार की त्वरित कार्रवाई

सतीशन ने कहा कि सरकार अगली बाढ़ का इंतजार नहीं करेगी और पत्तनमथिट्ठा जिले के तिरुवल्ला, रन्नी और आरणमुला जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए पूरे राज्य में नदियों से गाद निकालने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे।