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केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया

केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर में 'अदिया सिष्टम घी' की बिक्री से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के कर्मचारियों ने बिक्री से प्राप्त धन को हड़प लिया। अदालत ने इसे गंभीर गबन करार दिया है और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला तीर्थयात्रा के मौसम में वित्तीय जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।
 

न्यायालय का कड़ा रुख

केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर में हुई वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त कदम उठाया है। न्यायालय ने पवित्र 'अदिया सिष्टम घी' की बिक्री से प्राप्त धन में कथित हेराफेरी की उच्च स्तरीय सतर्कता जांच का आदेश दिया है।


मामले का विवरण

सबरीमाला मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाया गया घी, जिसे 'अदिया सिष्टम घी' कहा जाता है, मंदिर के काउंटर से बेचा जाता है। अदालत को जानकारी मिली कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के कर्मचारियों ने इस बिक्री से प्राप्त राशि को बोर्ड के खजाने में जमा करने के बजाय निजी रूप से हड़प लिया। अदालत ने पाया कि केवल दो महीने के भीतर (15 नवंबर 2023 से 5 जनवरी 2024 तक) लगभग ₹35 लाख की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की गई।


गबन की गंभीरता

एक TDB चीफ विजिलेंस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 16,628 पैकेट घी बिना पैसे जमा किए बेचे गए, जिसमें 13,679 पैकेट से 13,67,900 रुपये शामिल हैं। 27 दिसंबर, 2025 से 2 जनवरी, 2026 के बीच 22,565 पैकेट की कमी से 22,65,500 रुपये का राजस्व हानि हुई। बेंच ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत स्पष्ट रूप से आपराधिक गबन करार दिया।


प्रक्रियागत खामियां

कोर्ट ने काउंटर हैंडओवर के दौरान सुरक्षा उपायों की कमी, अनियमित रिकॉर्ड-कीपिंग और पैसे जमा करने में देरी पर कड़ी फटकार लगाई। कर्मचारी सुनील कुमार पोट्टी पर विशेष रूप से नाराजगी जताई गई, क्योंकि उन्होंने रसीदें नहीं दीं और 17 दिन बाद 68,200 रुपये जमा किए। उन्हें निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।


कोर्ट के निर्देश

न्यायालय ने 'ईमानदार और सक्षम अधिकारियों' की एक टीम को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। उन्हें एक महीने के भीतर कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। बेंच ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया और कहा कि बड़े अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी थी, लेकिन वे जानबूझकर अनजान बने रहे।


आर्थिक जवाबदेही की आवश्यकता

फैसले में TDB स्टाफ की आलोचना की गई है कि उन्होंने भक्तों के विश्वास से अधिक अपने निजी लाभ को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने दुरुपयोग की पूरी सीमा की व्यापक जांच का आग्रह किया है। यह घोटाला तीर्थयात्रा के मौसम के दौरान वित्तीय जवाबदेही के लिए आवश्यक सुधारों को उजागर करता है।