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केजरीवाल ने मोदी पर लगाए गंभीर आरोप, अमेरिका के प्रभाव पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि मोदी अमेरिका के प्रभाव में हैं और देश के हितों की रक्षा नहीं कर रहे। उन्होंने ट्रंप के हस्तक्षेप का भी जिक्र किया और E20 फ़्यूल के उपयोग पर चेतावनी दी। जानें इस मुद्दे पर पूरी जानकारी और केजरीवाल के बयान के पीछे की सच्चाई।
 

केजरीवाल का मोदी पर हमला

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में असफल रहे हैं। यह आरोप उस समय लगाया गया जब अमेरिकी सीनेट रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पर विचार कर रही थी। केजरीवाल ने मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि वे ट्रंप के निर्णयों को मानकर भारत के हितों से समझौता कर रहे हैं और कहा कि ट्रंप देश के मामलों में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं।


ट्रंप के प्रभाव का आरोप

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी जी ने देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है और ट्रंप की गुलामी स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि आज हर छोटे-बड़े निर्णय में ट्रंप का हस्तक्षेप है। मोदी जी ट्रंप की हर बात मानते हैं, चाहे वह सही हो या गलत। यह बयान अमेरिकी सीनेट द्वारा 'रूस प्रतिबंध बिल' पास किए जाने के बाद आया है, जिसका नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है।


रूस प्रतिबंध बिल का प्रभाव

यह विधेयक रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों, जिनमें भारत और चीन शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। सीनेट ने इसे 86 के मुकाबले 11 वोटों से पारित किया है। अब इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह विधेयक रूस के उच्च सरकारी अधिकारियों और रक्षा उद्योग की सहायता करने वाली विदेशी कंपनियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाएगा।


E20 फ़्यूल पर केजरीवाल की चेतावनी

इसके अलावा, केजरीवाल ने जनता से अपील की कि वे तब तक पेट्रोल और डीज़ल वाली गाड़ियां न खरीदें जब तक सरकार E20 फ़्यूल पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर देती। उन्होंने कहा कि सरकार ने E20 की पर्याप्त परीक्षण नहीं की है और इसके उपयोग से दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में 25-30 प्रतिशत की कमी आई है।