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केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने के आरोपों का जवाब देते हुए मुरुगन ने कहा

केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन ने हिंदी थोपने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कभी भी किसी राज्य पर हिंदी नहीं थोपी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में तमिल उम्मीदवारों के लिए भर्ती परीक्षाओं में अवसरों के विस्तार का भी उल्लेख किया। इस बीच, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है, जिससे राज्य और केंद्र के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस स्थिति में, तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है।
 

केंद्र सरकार की भाषा नीति पर मुरुगन का बयान

केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने कभी भी किसी राज्य पर हिंदी को थोपने का प्रयास नहीं किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय देते हुए कहा कि तमिल उम्मीदवारों के लिए केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं में अवसरों का विस्तार किया गया है। मुरुगन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मोदी के शासन में ही उम्मीदवारों को अर्धसैनिक भर्ती परीक्षाएं तमिल में देने की अनुमति मिली। उन्होंने तमिल भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने का भी उल्लेख किया, यह बताते हुए कि तिरुक्कुरल का अनुवाद 35 से अधिक भाषाओं में किया जा चुका है। उन्होंने डीएमके से सवाल किया कि तमिल भाषा के विकास के लिए उन्होंने कौन सी ठोस योजनाएं लागू की हैं?


मुख्यमंत्री स्टालिन के आरोपों का संदर्भ

मुरुगन की यह टिप्पणी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने के आरोप लगाने के बाद आई है। स्टालिन ने 'एक भाषा, तीन लिपि' नीति के तहत केंद्र सरकार पर हिंदी को थोपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार उच्चारण में कठिन हिंदी नामों को अंग्रेजी और तमिल लिपियों में हूबहू लिख रही है, और इस पर उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी है।


भाजपा पर हिंदी थोपने का आरोप

स्टालिन ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि भाजपा सरकार हिंदी थोपने के अपने प्रयासों में सभी सीमाएं पार कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 'एक भाषा, तीन लिपियाँ' नीति अपनाकर हिंदी को थोपने का घिनौना काम किया है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने तिरुचिरापल्ली रेलवे मंडल कार्यालय में 'कर्तव्य द्वार' को तीन लिपियों में लिखने का उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) कार्यालयों को भविष्य निधि भवन के नाम से संबोधित करने पर भी आपत्ति जताई।


राज्य और केंद्र के बीच खींचतान

राज्य सरकार और केंद्र के बीच लगातार तनाव बना हुआ है, जहां डीएमके की सरकार भाजपा पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रही है। इस बीच, राज्य ने दो-भाषा फॉर्मूले वाली शिक्षा नीति भी लागू की है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और डीएमके का गठबंधन एआईएडीएमके-भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।