केंद्र सरकार का बड़ा कदम: कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच अलाउंस की सुविधा
महिलाओं और सिंगल पेरेंट्स के लिए नई पहल
केंद्र सरकार ने कामकाजी महिलाओं और एकल अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए श्रम कानूनों के अंतर्गत, कंपनियों को छोटे बच्चों की देखभाल के लिए हर महीने क्रेच भत्ता प्रदान करना अनिवार्य हो सकता है। यह लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनके बच्चे छह वर्ष से कम उम्र के हैं। सरकार का मानना है कि इससे कार्यरत माताओं पर वित्तीय दबाव कम होगा और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा.
क्रेच अलाउंस की राशि
केंद्र सरकार ने 8 मई 2026 को नए श्रम कोड के नियम लागू किए हैं। इसके तहत, कर्मचारियों को हर बच्चे के लिए न्यूनतम 500 रुपये प्रति माह का क्रेच अलाउंस मिलेगा। यह सुविधा अधिकतम दो बच्चों तक और बच्चों की उम्र छह साल तक दी जाएगी.
नए नियमों का प्रभाव
नए नियमों के अनुसार, क्रेच अलाउंस की राशि कम से कम 500 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह होगी। यह विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं, विधुर कर्मचारियों और एकल अभिभावकों के लिए राहत प्रदान करेगा। PwC इंडिया के पार्टनर लोकेश गुलाटी के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी को क्रेच सुविधा नहीं मिलती है, तो संस्थान उसे हर महीने क्रेच अलाउंस देने के लिए बाध्य होगा.
कंपनियों के लिए विकल्प
पहले के श्रम कानूनों में कंपनियों के लिए केवल क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य था, लेकिन अब सरकार ने कंपनियों को दो विकल्प दिए हैं। वे या तो अपने परिसर में क्रेच की सुविधा प्रदान करें या कर्मचारियों को मासिक भत्ता दें। इससे उन कंपनियों को भी राहत मिलेगी जहां क्रेच बनाना संभव नहीं है.
कौन सी कंपनियों पर लागू होंगे नए नियम?
नए OSHWC केंद्रीय नियम 2026 कुछ विशेष संस्थानों पर लागू होंगे, जैसे रेलवे, खदानें, तेल क्षेत्र, बड़े बंदरगाह, हवाई परिवहन सेवाएं, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनियां। इसके अलावा, केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम और उनकी सहायक कंपनियां भी इन नियमों के दायरे में आएंगी.
महिलाओं के लिए प्रोत्साहन
यह कदम महिलाओं को नौकरी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा, क्योंकि अक्सर छोटे बच्चों की देखभाल के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ती है। क्रेच अलाउंस जैसी सुविधा उनके लिए आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर सहायक साबित हो सकती है.