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कुवैत का ऐतिहासिक निर्णय: 35 वर्षों में पहली बार कच्चे तेल का निर्यात शून्य

कुवैत ने 35 वर्षों में पहली बार कच्चे तेल का निर्यात शून्य कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है। यह निर्णय 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद का पहला ऐसा महीना है जब कुवैत ने निर्यात नहीं किया। इस स्थिति के पीछे क्षेत्रीय शिपिंग रूट्स में बाधाएं हैं। कतर ने ईरान से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आग्रह किया है। जानें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

कुवैत का अनोखा फैसला

कुवैत, जो दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है, ने 35 वर्षों में पहली बार एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। TankerTrackers की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत ने अप्रैल में कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया, जो कि तीन दशकों में पहली बार है। इस मॉनिटरिंग समूह ने बताया कि अप्रैल 2026 में कुवैत ने खाड़ी युद्ध I के बाद पहली बार शून्य बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया।


1991 के बाद का पहला महीना

यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो यह 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद कुवैत का पहला ऐसा महीना होगा जब उसने कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया। TankerTrackers ने कहा कि कुवैत का तेल उत्पादन जारी है, लेकिन निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया है। यह स्थिति क्षेत्रीय शिपिंग रूट्स में बाधाओं से संबंधित है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद समस्याएं भी शामिल हैं। कुवैत OPEC का एक महत्वपूर्ण सदस्य है और इसका तेल एशिया और यूरोप में निर्यात किया जाता है।


कतर का ईरान को संदेश

इस बीच, कतर ने ईरान से अनुरोध किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करे। कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की। उन्होंने कहा कि नेविगेशन की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना संकट को बढ़ा सकता है।


कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिकी क्रूड ऑयल WTI की कीमत 101.94 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई, जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 108.17 डॉलर प्रति बैरल रही। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें अमेरिका और ईरान के निर्णयों पर निर्भर करेंगी।